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एक बार आप जीएसटी देख लो.. जब पीएम मोदी ने किया था वित्त मंत्री को फोन, फिर हुई सबसे बड़े टैक्स रिफॉर्म की शुरुआत

उमाकांत त्रिपाठी।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई वाली जीएसटी काउंसिल ने टैक्स सुधार करते हुए आम आदमी को बड़ी राहत दी है. अब चार स्लैब्स की जगह सिर्फ पांच और 18 फीसदी के दो ही जीएसटी स्लैब्स होंगे. साथ ही जरूरी सामानों को टैक्स फ्री कर दिया गया है. पिछले साल दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री को एक हल्का सा इशारे देते हुए कहा था, ‘एक बार आप जीएसटी देख लो!’. इसी के बाद टैक्स सिस्टम में बदलाव की बड़ी कवायद की शुरुआत हुई थी, जिसका नतीजा अब सबके सामने है.

‘जीएसटी पर कर रही हैं न काम?’
सीतारमण, जिन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर मौजूदा चार जीएसटी स्लैब्स से आने वाली चुनौतियों से जुड़े मुद्दों की पहचान करने का काम शुरू किया था. उन्हें प्रधानमंत्री ने एक बार फिर याद दिलाया जब वह वित्त वर्ष 2025-26 का बजट तैयार कर रही थीं. पीएम मोदी ने पूछा था, ‘आप जीएसटी के ऊपर कर रही हैं न काम?’ प्रधानमंत्री के साथ चर्चा के बाद सीतारमण ने जीएसटी से संबंधित सभी चीजों की समीक्षा पर काम शुरू कर दिया. न सिर्फ टैक्स रेट और टैक्स स्लैब, बल्कि इस सिस्टम को व्यवसायों, विशेषकर छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए ज्यादा अनुकूल बनाने पर जोर था.

 

‘रेट पर इतना कन्फ्यूजन क्यों है?’
उन्होंने कहा,कि- राजस्थान के जैसलमेर में (दिसंबर 2024 में) हुई जीएसटी काउंसिल की पिछली बैठक से पहले ही प्रधानमंत्री ने मुझे फोन किया था और कहा था, ‘एक बार आप जीएसटी देख लो, कारोबारियों के लिए सब्सिडी बनाओ और रेट्स पर इतने सारे कन्फ्यूजन क्यों हैं?’ इसके तुरंत बाद, बजट में इनकम टैक्स राहत उपायों पर चर्चा के दौरान, पीएम मोदी ने उन्हें फिर से याद दिलाया, ‘आप जीएसटी के ऊपर कर रही हैं न काम?पिछले डेढ़ साल के दौरान जीएसटी के विभिन्न मुद्दों पर मंत्रियों के एक ग्रुप (GoM) की तरफ से किया गया काम कारगर साबित हुआ. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद मैंने यह फैसला लिया कि अब समय आ गया है कि आठ साल पूरे होने पर हम जीएसटी से संबंधित सभी चीजों की गहन समीक्षा करें, न सिर्फ रेट्स की, न सिर्फ स्लैब की संख्या की, बल्कि इस नजरिए से भी देखें कि कोई व्यवसाय, लघु या मध्यम व्यवसाय इसका किस प्रकार से सामना करेगा.’

 

निर्मला ने पीएम को दी पूरी जानकारी
उन्होंने कहा कि- आखिर में एक फरवरी 2025 से लेकर 15 मई तक हम यह स्टडी, रिव्यू करते रहे. निर्मला ने कहा, ‘मई के मध्य में, जब मैं पहली कट-ऑफ पर काम पूरा कर चुकी थी, मैं प्रधानमंत्री के पास गई और उन्हें बताया कि हम किसी फॉर्मूलेशन के करीब हैं, जो एक प्रस्ताव हो सकता है और मैंने उनसे समय देने का अनुरोध किया ताकि मैं उन्हें जानकारी दे सकूं. उन्होंने मुझे समय दिया और मैंने उन्हें जानकारी दी.’

जीएसटी में बदलाव पर अंतिम फैसला जीएसटी काउंसिल को लेना है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करती हैं और इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं. सीतारमण ने कहा कि एक बार व्यापक रूपरेखा पर सहमति बन जाने के बाद यह फैसला लिया गया कि यह छह विभिन्न राज्यों के GoM के सामने केंद्र सरकार का प्रस्ताव होना चाहिए, जिसे काउंसिल में विचार किए जाने से पहले रेट्स को सही करने पर विचार करने का काम सौंपा गया था.

‘मंत्रियों के समूह के काम का सम्मान’
उन्होंने कहा,कि- इसलिए हम यह साफ करना चाहते हैं कि हम GoM की ओर से किए गए सभी कामों का सम्मान करते हैं, लेकिन यह प्रस्ताव विशेष रूप से केंद्र की ओर से आ रहा है, जो काउंसिल में एक तिहाई भागीदार है. इसके बाद रेट्स को युक्तिसंगत बनाने के लिए गठित GoM, जिसकी शुरुआत वास्तव में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज सोमप्पा बोम्मई के नेतृत्व में हुई थी और बाद में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसकी अध्यक्षता की, ने केंद्र के प्रस्ताव पर विचार किया.

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