उमाकांत त्रिपाठी।रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले साल होने वाले आंध्र प्रदेश केए ट्रेन हादसे को लेकर खुलासा किया वैष्णव ने बताया कि जिन दो पैसेंजर ट्रेनों की टक्कर में 14 यात्रियों की मौत हुई थी, उनमें से एक पायलट फोन पर क्रिकेट मैच देख रहे थे।
हादसे में रायगड़ा पैसेंजर ट्रेन के पायलट की मौत हो गई थी। रेलवे के शुरुआती जांच में दोनों को हादसे के लिए जिम्मेदार माना गया था। क्योंकि उन्होंने दो लाल सिग्नल पार कर दिए थे। हादसे में 50 से अधिक यात्री घायल हुए थे।
बिस्वजीत साहु -बोले
ईस्ट कोस्ट रेलवे के CPRO बिस्वजीत साहू ने बताया था कि हादसा मानवीय भूल के चलते हुआ। विशाखापट्टनम-रायगड़ा पैसेंजर ट्रेन के ड्राइवर ने सिग्नल को ओवरशूट किया, जिससे यह आगे चल रही विशाखापट्टनम-पलासा पैसेंजर ट्रेन से भिड़ गई। टक्कर से दोनों ट्रेन के पांच डिब्बे पटरी से उतर गए। इनमें से 3 कोच आगे की ट्रेन के और दो पीछे आ रही ट्रेन के थे।सिग्नल ओवरशूट तब होता है जब कोई ट्रेन रेड सिग्नल पर रुकने के बजाय आगे बढ़ जाती है। हादसे के बाद इस रूट पर 33 ट्रेनें रद्द कर दी गई थीं। 11 ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द की गईं और 22 ट्रेनों का रूट डायवर्ट किया गया था।
रेल मंत्री बोले
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मई 2022 में ट्रेन में लगने वाले कवच सिस्टम के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था- ‘कवच एक ऑटोमेटिक रेल प्रोटेक्शन की टेक्नोलॉजी है। इसमें ये होता है कि मान लीजिए दो ट्रेन गलती से एक ही ट्रैक पर आ जाएं तो उनके पास आने से पहले कवच ब्रेक ट्रेन को रोक देगी, जिससे एक्सीडेंट होने से बच जाएगा।रेल मंत्री के इस बयान के बाद से ट्रेन डीरेल होने के कई मामले सामने आ चुके हैं।
65 इंजनों में लगा कवच
मई 2022 में अश्विनी वैष्णव ने रेल हादसे रोकने के लिए इंजनों को सुरक्षा कवच पहनाने की घोषणा की थी। एक साल बाद भी 19 रेलवे जोन में से सिर्फ सिकंदराबाद में ही कवच लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। देश में कुल 13,215 इलेक्ट्रिक इंजन हैं। इनमें सिर्फ 65 लोको इंजनों को ही कवच से लैस किया गया है। 2022-23 वित्तीय वर्ष में भारतीय रेलवे ने देशभर में कम-से-कम 5000 किलोमीटर रूट पर कवच लगाने का लक्ष्य रखा था।














