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दुनिया में 44 लाख लोगों को है सिकल सेल एनीमिया की बीमारी, इस बीमारी से हो सकती है आपके बच्चों की मौत; जानिए इसके बारे में सब-कुछ

खबर टीम इंडिया की। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में करीब 44 लाख लोग सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित हैं। इससे प्रभावित लोगों की 90% आबादी नाइजीरिया, भारत और कांगो में रहती है। ये आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। यह बीमारी कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले साल 1 जुलाई, 2023 को ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन’ की शुरूआत की थी। मिशन का मकसद है वर्ष 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को भारत से पूरी तरह खत्म करना।

हाल ही में आई एक नई स्टडी
हाल ही में सिकल सेल एनीमिया को लेकर एक स्टडी आई है। यह स्टडी अमेरिका की ‘इंडियाना यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन’ ने की है। इस स्टडी के मुताबिक खून में हीमोग्लोबीन बढ़ाने वाली दवा ‘हाइड्रॉक्सीयूरिया’ सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित बच्चों में संक्रमण को कम करने में मददगार हो सकती है। रिसर्चर्स ने अफ्रीकी देश युगांडा में इस दवा को लेकर स्टडी की और सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित बच्चों पर इस दवा का सकारात्मक असर देखने को मिला। रिसर्चर्स का कहना है कि हाइड्रॉक्सीयूरिया के इस्तेमाल से अफ्रीकी बच्चों की मृत्यु दर में कमी आ सकती है। पूरे अफ्रीका महाद्वीप में बच्चों की मौत की बड़ी वजह सिकल सेल एनीमिया है।

लाल रक्त कणिकाओं का हो जाता है बुरा हाल
सिकल सेल एनीमिया में शरीर की लाल रक्त कणिकाओं का आकार बदलकर हंसिए की तरह हो जाता है और वो एक-दूसरे में फंसकर रक्त के प्रवाह को बाधित करती हैं। इसे और सरल ढंग से ऐसे समझते हैं। हमारे शरीर में शिराओं और धमनियों में रक्त लगातार प्रवाहित हो रहा है। इस रक्त में मौजूद रेड ब्लड सेल्स (RBC) का आकार गोल और लचीला होता है। यह एक-दूसरे से टकराते हुए आसानी से खून में इधर-उधर मूव करती रहती हैं। लेकिन जिसे सिकल सेल एनीमिया है, उसकी लाल रक्त कणिकाओं की आकृति सिकल यानी हंसिए की तरह होकर आपस में फंसने लगती है। इससे खून का प्रवाह बाधित होता है और जिस-जिस जगह पर ये हंसिए जैसी रेड ब्लड सेल्स आपस में उलझती हैं, वहां तेज दर्द होता है। यह स्थिति कई बार इतनी गंभीर होती है कि तुरंत मौत भी हो सकती है।

सिकल सेल के साथ जन्म लेते हैं बच्चे
लाल रक्त कोशिकाओं का आकार हंसिये की तरह होने का कारण एक असामान्य हीमोग्लोबीन प्रोटीन है। दरअसल इन कोशिकाओं में पाया जाने वाला हीमोग्लोबीन(Hb) पूरे शरीर को ऑक्सीजन सप्लाई करता है। लेकिन आनुवांशिक गड़बड़ी की वजह से हीमोग्लोबीन प्रोटीन के स्वरूप में बदलाव आ जाता है। WHO के मुताबिक पूरी दुनिया में हर साल 3 लाख से ज्यादा बच्चे सिकल सेल एनीमिया के साथ जन्म लेते हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
आगरा में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव खंडेलवाल के अनुसार, रेड ब्लड सेल्स की उम्र 120 दिन की होती है। लेकिन जब यह सिकल का आकार ले लेतीं हैं तो इनकी लाइफ महज 20 से 30 दिन ही रह जाती है। हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को लेकर एक खास सिस्टम बना हुआ है। ये कोशिकाएं नियंत्रित तरीके से 120 दिन की जिंदगी जीकर खुद ही नष्ट हो जाती हैं। इनकी जगह स्वस्थ कोशिकाएं ले लेती हैं। लेकिन सिकल सेल एनीमिया होने पर नई लाल रक्त कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है। साथ ही उनका लाइफ स्पैन भी कम हो जाता है। इसलिए इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति हमेशा एनीमिक रहता है यानी उसके शरीर में खून की कमी होती है।

 

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