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गुजरात में राजकीय शोक, कोई समारोह नहीं होगा

बीते दिनों गुजरात में एक बड़ा हादसा हो गया। जिसमें सैकड़ो लोगों की जान चली गई। मामले की जांच पड़ताल चल रही है। दोषियों की शिनाख्त करने के लिए फैक्ट फाइंडिग कमिटि का गठन किया गया है। जो मामले की गहन छानबीन करेंगे और बताएंगे कि आखिर इस मामले में चुक कहां और किससे हुई। साथ ही इस मामले में अगर अनियमितता हुई है तो वो कौन लोग हैं जिनकी वजह ही इतनी बड़ी घटना हो गई जिसमें सैकड़ो लोगों की जान चली गई और सैकड़ो लोग अभी भी अस्पतालों में मौत से जंग लड़ रहे हैं।

गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर हुए हादसे के दो दिन गुजर चुके हैं, फिर भी इस हादसे का दर्द कम नहीं हो पा रहा है। गुजरात में आज राजकीय शोक है। सरकार की तरफ कोई समारोह और मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा। तो वहीं गुजरात के सौराष्ट्र में इस हादसे की गूंज सर्वाधिक है। इसके पीछे मच्छु नदी पर बना केबल ब्रिज है। मच्छु नदी की बात करें तो यह गुजरात की अपनी नदी हैं जो राजकोट जिले में जसदण की पहाड़ियों से निकलती है और 130 किलोमीटर चल कर कच्छ के रण में मालिया में मिलती है।


नदी से मिलता है पानी
घड़ियों के कारोबार, टाइल्स और टाइल्स की डिजाइन को लेकर दुनियाभर में मोरबी का नाम है। मोरबी को द टाइल्स कैपिटल ऑफ इंडिया भी कहा जाता है। यह शहर मच्छु नदी के किनारे पर बसा है। मोरबी के बिल्कुल पास से निकलने वाली यह नदी कई मायने में जीवनदायिनी के समान है, लेकिन पुल हादसे से इसकी चर्चा गलत वजह से हो रही है। यह दूसरा मौका है जब मच्छु नदी शोक का कारण बनी है। 1979 में मच्छु-2 बांध टूटा था तो बड़ी त्रादसी हुई थी। इसमें बड़ी जनहानि हुई थी।

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