उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि- ‘हमारी मीडिया के बारे में ऐसा कल्चर बन गया है कि कुछ भी मत करो, बस इन्हें संभाल लो, अपनी बात बता दो तो देश में चली जाएगी. मुझे उस रास्ते पर नहीं जाना है. मुझे मेहनत करनी है, मुझे गरीब के घर तक जाना है. मैं भी विज्ञान भवन में फीते काटकर फोटो निकलवा सकता हूं. मैं एक छोटी योजना के लिए झारखंड के एक छोटे से डिस्ट्रिक्ट में जाकर काम करता हूं. मैं एक नए वर्क कल्चर को लाया हूं. उस कल्चर को मीडिया को अगर सही लगे, तो वो प्रस्तुत करे. न लगे तो न करे.’
‘पहले कम्युनिकेशन का एक ही सोर्स था’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले कम्युनिकेशन का एक ही सोर्स था, लेकिन आज कई हैं. उन्होंने कहा, ‘पहले आप मीडिया के बिना जा ही नहीं सकते थे. आज कम्युनिकेशन के कई माध्यम हैं. आज जनता भी बिना मीडिया अपनी आवाज बता सकती है. बिना मीडिया कोई भी व्यक्ति अपना जवाब दे सकता है.’उन्होंने सालों पुराना एक वाकया याद करते हुए बताया, ‘मैं जब गुजरात में था, तब मैं पब्लिक मीटिंग में पूछता था- क्यों भाई ऐसा कार्यक्रम बनाया है, कोई काले झंडे वाला नहीं दिखता है. अरे भाई, दो-तीन काले झंडे वाले रखो तो कल अखबार में छपेगा कि मोदी जी आए थे तो दस लोगों ने काले झंडे दिखाए. कम से कम लोगों को पता तो चलेगा कि मोदीजी यहां आए थे. काले झंडे बिना मेरी सभा कौन पूछेगा? मैंने दस साल ऐसे भाषण किए गुजरात में. मेरा डेली का यही कार्यक्रम था.’
पीएम ने सुनाया पुराना वाकया
उन्होंने एक और वाकया सुनाते हुए कहा, ‘एक दिन मेरे गांव के लोग मिलने आए. मेरा अभिनंदन करने आए तो बोले कि हमारे गांव में 24 घंटे बिजली हो गई है. इसलिए हम आपको अभिनंदन करने आए हैं. गुजरात में मेरे घर में मंगलवार को किसी को भी एंट्री थी. उन्होंने कहा 24 घंटे बिजली आ गई है. मैंने कहा कि झूठ है, नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि नहीं साहब हो गई है. मैंने कहा कि मैंने तो किसी अखबार में नहीं पढ़ा कि तुम्हारे यहां 24 घंटे बिजली हो गई है. उन्होंने कहा कि नहीं साहब, रेडियो वाले, अखबार वाले नहीं बताएंगे कि 24 घंटे बिजली आ गई है.’














