उमाकांत त्रिपाठी।केंद्रीय सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 के आम बजट को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के जाने-माने अर्थशास्त्रियों के साथ बजट से जुड़े तमाम मुद्दों पर चर्चा की। आर्थिक विकास को गति देने से लेकर आम लोगों से जुड़े विषयों पर अर्थशास्त्रियों व विशेषज्ञों के सुझावों को लिया गया।
सूत्रों का कहना है कि- आगामी बजट में केंद्र सरकार का पूरा ध्यान देश के आर्थिक विकास को गति देने और मध्य वर्ग पर रहेगा। ऐसे में बैठक के अंदर अर्थशात्रियों और विशेषज्ञों के सुझाव लिए गए। उनसे जाना गया कि किस तरह से आर्थिक विकास को गति दे सकते हैं। बजट में ऐसे क्या प्रावधान किए जाने की जरूरत है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिले। ध्यान रहे कि बीती तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर (सकल घरेलू उत्पाद) 5.4 प्रतिशत रही है। हालांकि इसके पीछे आम चुनाव और मानसून जैसे प्रमुख कारण जिम्मेदार है लेकिन सरकार आर्थिक विकास को लेकर गंभीर है और चाहती है कि आने वाले वर्षों में देश में आर्थिक विकास को गति मिले। इसलिए कृषि, ऊर्जा, शिक्षा, विनिर्माण से लेकर आधारभूत ढांचे जैसे तमाम क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस बात पर भी चर्चा की गई कि बजट के जरिए आम आदमी से लेकर मध्य वर्ग को किस तरह से राहत दी जा सकती है।
केंद्रीय वित्त मंत्री 1 फरवरी को वित्त वर्ष का आम बजट पेश करेंगी
केंद्रीय वित्त मंत्री एक फरवरी को आगामी वित्त वर्ष का आम बजट पेश करेंगी। उससे पहले सभी क्षेत्रों से जुड़े लोगों से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव,नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बीवीआर सुब्रमण्यम, मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन, अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला, डीके जोशी समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल हुए।
वित्त मंत्री 30 दिसंबर तक करेंगी अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों साथ बैठक
बजट-पूर्व परामर्श की शुरुआत इस महीने की 6 तारीख को चुकी है। प्रधानमंत्री की बैठक से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री तीन बैठकें कर चुकी है, जिसमें अर्थशास्त्री, किसान संगठन व कृषि अर्थशास्त्री और एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल हुए है। अभी बैठकों का दौर 30 दिसंबर तक चलना है, जिसमें वित्त मंत्री व्यापार और सेवा, व्यापार संगठन, वित्तीय क्षेत्र और कैपिटल गुड्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और अर्बन क्षेत्र, उद्योग और स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह बैठकें 26,27,28 और 30 दिसंबर को होंगी।














