US Iran Conflict एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। अमेरिका ने लगातार चौथे दिन ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखते हुए होर्मुज स्ट्रेट के आसपास कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार करीब सात घंटे तक चले इस अभियान में ईरान के मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, नौसैनिक संसाधनों और तटीय रक्षा प्रणाली को निशाना बनाया गया। वहीं, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
Breaking News🚨:
The US has completely destroyed the IRGC headquarters in Iran. This was the primary location from which Iran controlled its air force. The attack was so massive that surrounding buildings were completely destroyed. An uncontrollable fire is raging at the site… pic.twitter.com/JAMQebHKzW
— Us_militryPower (@Trumpspoof__) July 13, 2026
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान समझौते के लिए आगे नहीं आता, तो अगले चरण में बिजलीघर, पुल और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है। दूसरी ओर ईरान ने साफ किया है कि वह अमेरिकी दबाव में नहीं झुकेगा।
अमेरिका ने किन ठिकानों को बनाया निशाना?
CENTCOM के अनुसार मंगलवार रात शुरू हुआ अभियान लगभग सात घंटे तक चला। इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट के आसपास स्थित कई सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की गई।
Iran Us War Updates
IRGC claims US logistics hub in Kuwait set ‘ablaze’
Iran says it targeted US F-18 aircraft positions at Jordan’s al-Azraq base
Air raid sirens activated in Bahrain
US hits soldiers’ accommodation at Iran’s Bampur military base
Oil prices rise pic.twitter.com/kfYPFxgGS5
— Shakeel Yasar Ullah (@yasarullah) July 15, 2026
अमेरिका का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता, ड्रोन संचालन और समुद्री सैन्य गतिविधियों को कमजोर करना था ताकि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नौवहन सुरक्षित रह सके।
वहीं ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी हमलों की आलोचना करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।
ईरान का जवाबी दावा, अमेरिकी ठिकानों पर हमले
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट बेस और जॉर्डन के अजराक एयरबेस सहित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
Footage of an Iranian Shahed-136 attack drone slamming into a warehouse in Kuwait earlier this evening.
Strikes on both sides have grown from distinct waves to a steady drumbeat of attacks today as the Iran war reescalates. pic.twitter.com/U34jJnRyg9
— OSINTtechnical (@Osinttechnical) July 15, 2026
इसके अलावा ईरानी मीडिया ने कतर के अल-उदीद एयरबेस को हुए नुकसान से जुड़ी सैटेलाइट तस्वीरें भी साझा की हैं। हालांकि अमेरिका ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है और स्वतंत्र स्रोतों से भी इनकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
ट्रम्प की नई चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यदि ईरान बातचीत और समझौते के लिए तैयार नहीं होता है तो अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई का दायरा और बढ़ा सकता है।
ट्रम्प ने कहा कि अगली कार्रवाई में बिजली उत्पादन केंद्र, पुल और अन्य रणनीतिक ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है।
इसके अलावा उन्होंने ईरान के पिकऐक्स माउंटेन न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स का भी उल्लेख किया। अमेरिका का मानना है कि यह परिसर ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह ठिकाना पहाड़ के भीतर काफी गहराई में स्थित है और इसे पूरी तरह नष्ट करना बेहद कठिन होगा।
पिछले 24 घंटे के पांच बड़े घटनाक्रम
बीते 24 घंटों में कई महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आईं।
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर हमला करने का दावा किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस घटना में एक भारतीय नागरिक की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। भारतीय चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप प्रमुख को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत से जुड़े 11 जहाज और 148 भारतीय नाविक फिलहाल फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
उधर राष्ट्रपति ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर प्रस्तावित 20 प्रतिशत टैक्स लगाने का निर्णय वापस ले लिया। बताया गया कि यह फैसला क्षेत्रीय नेताओं के साथ बातचीत के बाद लिया गया।
शिपिंग डेटा के अनुसार मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट से केवल चार जहाज गुजरे, जो हाल के समय का सबसे कम समुद्री यातायात माना जा रहा है।
अमेरिका और ईरान फिर आमने-सामने क्यों?
विशेषज्ञों के अनुसार दोनों देशों के बीच तनाव के कई प्रमुख कारण हैं।
सबसे पहला मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। अमेरिका इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह खुला रखना चाहता है, जबकि ईरान इसे अपनी सुरक्षा से जुड़ा विषय मानता है।
दूसरा बड़ा कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका यूरेनियम संवर्धन पर कड़ी निगरानी चाहता है जबकि ईरान इसे अपना वैध अधिकार बताता है।
इसके अलावा आर्थिक प्रतिबंध, पश्चिम एशिया में प्रभाव और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे भी दोनों देशों के बीच लगातार विवाद का कारण बने हुए हैं।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है।
यदि समुद्री मार्ग प्रभावित होता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति, शिपिंग लागत और वैश्विक बाजारों पर असर पड़ सकता है।
भारत सरकार ने कहा है कि वह क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यक कूटनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं।
स्थिति लगातार बदल रही है
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव पूरे पश्चिम एशिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय संयम और बातचीत की अपील कर रहा है।
हालांकि युद्ध से जुड़े कई दावे दोनों पक्षों की ओर से किए जा रहे हैं, जिनमें से कई की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। इसलिए घटनाक्रम पर आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर नजर बनाए रखना आवश्यक है।














