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केंद्र ने सहकारी समितियों का राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने पर परामर्श शुरू किया

केंद्र ने सहकारी समितियों पर एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श शुरू किया है, जिससे राज्यों और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के बीच तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी और साथ ही प्रभावी कामकाज तथा बाजार उन्मुखीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

इस संबंध में हाल ही में पहली बैठक सहकारिता सचिव डी के सिंह की अध्यक्षता में हुई थी। इस बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के अलावा सहकारी संघों, आरबीआई, नाबार्ड और आईआरएमए जैसे संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

सहकारिता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस का सभी ने स्वागत किया। यह सहकारी क्षेत्र में नीति निर्माण के लिए सबसे महत्वपूर्ण साधन होगा।’’

उन्होंने कहा कि कई राज्य सरकारें और केंद्रीय मंत्रालय सहकारी समितियों के लाभ के लिए योजनाएं चला रहे हैं, लेकिन इस समय कोई प्रामाणिक डेटाबेस नहीं है।

अधिकारी ने कहा कि डेटाबेस को सुव्यवस्थित करने के लिए हितधारकों से डिजिटल या भौतिक रूप में उपलब्ध डेटा देने के लिए कहा गया है।

उन्होंने बताया कि हितधारकों से आंकड़ों को तत्काल अपडेट करने और इसके लिए तंत्र स्थापित करने पर अपने विचार देने के लिए कहा गया है। इसके अलावा आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के तरीकों पर भी सुझाव मांगे गए हैं।

भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) के आंकड़ों के अनुसार इस समय 8.5 लाख सहकारी समितियां हैं, जिनमें से 20 प्रतिशत ऋण सहकारी समितियां हैं और शेष 80 प्रतिशत गैर-ऋण सहकारी समितियां हैं।

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