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बेटी कोई सामग्री नहीं, जिसे दान कर दिया जाए: आचार्य अमित कुमार झा

मुजफ्फरपुर के काली बाड़ी निवासी आचार्य अमित कुमार झा के पुत्री की शादी में एक अनोखी पहल देखने को मिली। शादी में “कन्या दान” के वर्षों पुराने रिवाज को बदला गया।

कन्या दान के समय कन्या की जगह कन्या की मुर्ती को दान में दिया गया। इस संबंध में कन्या के पिता आचार्य श्री झा ने बताया कि “हमारी पुत्री कोई सामग्री या वस्तु नहीं है, जिसे दान में दिया जाए। मेरी पुत्री हमारी है और सदा हमारी ही रहेगी।आजीवन पुत्री का हमपर अधिकार रहेगा। उसे दान में देकर हम उसके अधिकार का हनन नहीं कर सकते।दान किये गए वस्तु पर, दान करने वाले का अधिकार समाप्त हो जाता है। इसलिये हम अपनी बच्ची का विवाह कर उसके दाम्पत्य जीवन की शुरुआत कर रहे हैं। उसपर अपना अधिकार समाप्त नहीं कर रहे।”

आचार्य श्री झा द्वारा शादी में “कन्या दान” के इस नये प्रयोग को अधिकांश माता-पिता ने सराहा है।वर के माता-पिता ने भी इस पहल को सहर्ष स्वीकारा है। विवाह के इस मैके पर, शहर के कई गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।

कन्यादान की रस्म पिता और बेटी के भावनात्मक रिश्ते को दर्शाती है। ये रस्म शादी की महत्वपूर्ण रस्मों में से एक है। यह एक ऐसी रस्म है जो अपने परिवार के साथ दुल्हन के रिश्तों को काटती है और उसे नए परिवार और जीवन को स्वीकार करने के लिए स्वतंत्र छोड़ देती है।

हालांकि, जब तक किसी विवाह में कन्यादान और सात फेरों की रस्म पूरी नहीं होती, तब तक वो विवाह भी संपन्न नहीं होता।

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