दिल्ली

‘संसद रत्न पुरस्कार’ के लिए सुप्रिया सुले और अमर पटनायक समेत 11 सांसदों का चयन

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सुप्रिया सुले और बीजू जनता दल (बीजद) के अमर पटनायक सहित 11 सांसदों को इस साल का ‘संसद रत्न पुरस्कार’ दिया जाएगा।

‘प्राइम प्वांइट फाउंडेशन’ ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

संस्था की निर्णायक समिति ने तमिलनाडु से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एच.वी. हांडे और कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार के लिए नामित किया है।

इसके साथ ही कृषि, वित्त, शिक्षा और श्रम से संबंधित संसद की चार समितियों को उनके योगदान के लिए पुरस्कृत किया जाएगा।

फाउंडेशन ने एक बयान में कहा कि जिन 11 सांसदों का चयन ‘संसद रत्न पुरस्कार’ के लिए किया गया है, उनमें लोकसभा के आठ और राज्यसभा के तीन सदस्य शामिल हैं।

बयान के मुताबिक, राकांपा की सुप्रिया सुले, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एन.के. प्रेमचंद्रन और शिवसेना के श्रीरंग अप्पा बार्ने को उनके सतत उत्कृष्ट कामकाज के लिए ‘संसद विशिष्ट रत्न’ पुरस्कार दिया जाएगा

तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, कांग्रेस सांसद कुलदीप राय शर्मा (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह), भाजपा के विद्युत बरन महतो (झारखंड), हिना गावित (महाराष्ट्र) और सुधीर गुप्ता (मध्य प्रदेश) के नामों को 17वीं लोकसभा में उनके कामकाज के लिए ‘‘संसद रत्न पुरस्कार’’दिया जाएगा।

बीजद के अमर पटनायक और राकांपा की फौजिया अहमद खान को ‘वर्तमान सदस्य’ की श्रेणी में इस पुरस्कार के लिए सूचीबद्ध किया गया है। माकपा सदस्य केके रागेश को उनके कार्यकाल के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 2021 में ‘अवकाशप्राप्त सदस्य’ की श्रेणी में इस पुरस्कार के लिए नामित किया गया है।

‘प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन’ के संस्थापक प्रमुख के. श्रीनिवास ने बताया कि वर्तमान लोकसभा के आरंभ से लेकर पिछले साल हुए शीतकालीन सत्र के दौरान कामकाज के आधार पर सांसदों को इस पुरस्कार के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

संसद रत्न पुरस्कार समिति की अध्यक्षता संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सह-अध्यक्षता पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी एस कृष्णमूर्ति ने की।

इन पुरस्कारों की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के सुझावों के मद्देनजर की गई थी। उनका सुझाव भारतीय संसद में ‘‘सबसे बेहतरीन प्रदर्शन’’ करने वाले सांसदों को सम्मानित करने का था।

यह ‘‘प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन’’ और ई-पत्रिका प्रीसेंस द्वारा 2010 में स्थापित एक निजी पुरस्कार है। पहला पुरस्कार कार्यक्रम 2010 में चेन्नई में हुआ था। अभी तक 75 सांसदों को इस पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।

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