उमाकांत त्रिपाठी।मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में न्याय की गुहार लगाने पहुंची 21 साल की लड़की ने जो दास्तां सुनाई है, उसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है. रतलाम के एक छोटे से गांव से भागकर आई इस लड़की ने आरोप लगाया है कि उसके सगे माता-पिता और मामा उसे 200 रुपए में हर रोज देह व्यापार के दलदल में धकेलते थे.
पीड़िता के अनुसार, जब वह मात्र 14 साल की थी और उसके हाथों में स्कूल की किताबें होनी चाहिए थीं, तब उसके परिजनों ने उसे देह व्यापार के धंधे में झोंक दिया. लड़की ने बताया कि- उसके घर पर ही ग्राहकों का आना-जाना लगा रहता था. उसके पिता और भाई कोई काम नहीं करते थे और पूरा परिवार उसकी और उसकी जैसी अन्य लड़कियों की ‘काली कमाई’ पर ही पलता था.
समाज की परंपरा का ‘खौफनाक’ चेहरा लड़की ने अपनी आपबीती में बाछड़ा समाज में व्याप्त उस कुप्रथा की पोल खोली है, जिसे समाज के लोग ‘परंपरा’ का नाम देते हैं. उसने बताया कि- हमारे समाज में लड़कियों को इसी काम के लिए पाला जाता है. गांव की एक हजार से ज्यादा लड़कियां आज इसी दलदल में हैं. भाई और पिता घर पर बैठकर बेटियों की कमाई खाते हैं. जब मैंने विरोध किया, तो कहा गया कि यही हमारे समाज का रिवाज है.
कोचिंग के बहाने घर से निकली शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना सह-सहकर बुरी तरह टूट चुकी लड़की ने एक दिन इस नरक से निकलने की ठानी. उसने परिजनों से शहर जाकर कोचिंग करने की इच्छा जताई. घरवालों को लगा कि शायद वह बाहर जाकर और ज्यादा ‘कमाई’ करेगी, इसी लालच में उन्होंने उसे जाने दिया. इसी मौके का फायदा उठाकर किशोरी ने सीधे भोपाल की बस पकड़ी और वहां पहुंचकर महिला थाने में अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई.
‘रतलाम पुलिस पर नहीं था भरोसा’
जब एक निजी चैनल ने लड़की से पूछा कि- वह अपने जिले की पुलिस के पास क्यों नहीं गई? तो उसने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए. पीड़िता का कहना था कि- उसके गांव और जिले की पुलिस इस सिंडिकेट के बारे में सब जानती है, लेकिन वे कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती, बल्कि अक्सर आरोपियों का ही साथ देते हैं. इसी डर से वह अपनी जान बचाने भोपाल पहुंची.
पुलिस की कार्रवाई और FIR भोपाल महिला थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की. लड़की के माता, पिता और दो मामाओं के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की गई है. आरोपियों पर मानव तस्करी, रेप की साजिश और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत कड़े प्रावधान लगाए गए हैं. उसे शासकीय संरक्षण के तहत ‘गौरवी’ में रखा गया था. लेकिन लड़की का आरोप है कि- संस्था के लोग उस पर दबाव बना रहे हैं कि वह अपने परिजनों से समझौता करके अपने घर लौट जाए. लेकिन लड़की ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी हाल में अपने गांव वापस नहीं जाएगी.
इनका कहना है कि- महिला थाना प्रभारी अंजना दुबे ने बताया कि- एनजीओ कार्यकर्ता पीड़िता लड़की को थाने लाए थे. उन्होंने बताया कि- पीड़िता रतलाम की रहने वाली है और वहां उसके साथ कुछ गलत हो रहा है. उन्होंने कहा कि- आप इसकी पूछताछ करके जो भी कानूनी कार्रवाई बनती है, वह कर दीजिए. इस पर मैंने वरिष्ठ अधिकारियों से बात की और जीरो एफआईआर दर्ज कर रतलाम पुलिस को भेज दी. चार लोगों मां, पिता और दो मामाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई. एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.














