उमाकांत त्रिपाठी। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। Shiv Sena UBT Crisis के बीच दावा किया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 सांसदों ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन दे दिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है और इसे उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। इस बीच शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने संभावित बागी सांसदों को खुली चुनौती दी है।
बागी सांसदों को संजय राउत की चुनौती
बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय राउत ने कहा कि अगर कोई सांसद पार्टी छोड़कर दूसरे गुट में जाना चाहता है तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2022 की तरह यदि दोबारा शिवसेना में फूट डालने की कोशिश की गई तो महाराष्ट्र की जनता और पार्टी कार्यकर्ता इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे और पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं की मेहनत से सांसद चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। ऐसे में नैतिकता का तकाजा है कि पार्टी छोड़ने से पहले वे जनता के बीच जाकर दोबारा जनादेश हासिल करें।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कौन-कौन रहा मौजूद?
दिल्ली में हुई इस प्रेस वार्ता के दौरान शिवसेना (UBT) के नौ लोकसभा सांसदों में से केवल तीन सांसद ही मौजूद दिखाई दिए। इनमें अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे शामिल थे।
अन्य सांसदों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है। माना जा रहा है कि यही वजह है कि पार्टी में संभावित टूट की चर्चा जोर पकड़ रही है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक किसी सांसद के आधिकारिक रूप से अलग होने की पुष्टि नहीं की गई है।
सांसदों की खरीद-फरोख्त का आरोप
संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सांसदों को कथित तौर पर 15 करोड़ रुपये तक का ऑफर दिया जा रहा है।
राउत ने कहा कि यदि क्षेत्रीय दलों और विपक्षी पार्टियों को इस तरह तोड़ा जाता रहा तो लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया का महत्व खत्म हो जाएगा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) जैसे दलों का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को कमजोर करने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल
यदि 6 सांसदों के शिंदे गुट को समर्थन देने की खबर सही साबित होती है तो यह उद्धव ठाकरे की पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव के बाद सबसे बड़ा झटका माना जाएगा। इससे पहले भी 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी बगावत हुई थी, जिसके बाद शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी।
फिलहाल, सभी की नजरें आने वाले दिनों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये सांसद औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होते हैं या फिर यह केवल राजनीतिक दबाव और अटकलों तक सीमित रहता है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में बड़े बदलाव का संकेत दे सकता है।














