उमाकांत त्रिपाठी। वाराणसी दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से अपनी इच्छा के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि- मेरी बहुत इच्छा थी कि, सावन में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करूं, लेकिन वो नहीं गए। उन्होंने इसके पीछे की वजह भी बताई। मोदी ने नम: पार्वती पतये, हर-हर महादेव के साथ संबोधन की शुरुआत की। भोजपुरी में कहा- सावन के पावन महीने में आज हमके काशी के हमरे परिवार के लोगन से मिलय का अवसर मिलल हय। हम काशी के हर परिवार जन के प्रणाम करत हई।
#WATCH | वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर जवानों के पराक्रम का वह पल और आज किसानों को प्रणाम करने का अवसर। आज यहां एक विराट किसान उत्सव का आयोजन हो रहा है। देश के 10 करोड़ किसान भाई-बहनों के खातों में 21 हजार करोड़ रुपये PM किसान सम्मान निधि के रूप में… pic.twitter.com/4VwMh9iKf6
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 2, 2025
इस वजह से नहीं गए पीएम मोदी
मोदी ने कहा- इन दिनों काशी में गंगाजल लेकर जाते हुए शिव भक्तों की तस्वीरें देखने को मिलती हैं। खासकर सावन के पहले सोमवार को जब हमारे यादव बंधु बाबा का जलाभिषेक करने निकले तो उनका समूह कितना मनोरम होता है। डमरू की आवाज गलियों में कोलाहल की अद्भुत भाव प्रकट करता है। मेरी भी बहुत इच्छा थी कि सावन में बाबा विश्वनाथ और मार्कण्डेय महादेव के दर्शन करूं, लेकिन मेरे वहां जाने से महादेव के भक्तों को असुविधा न हूं, इसलिए मैं आज यहीं से भोलेनाथ और मां गंगा को प्रणाम कर रहा हूं। हम सेवापुरी के ई-मंच से बाबा विश्वनाथ के प्रणाम करत हई। नम: पार्वती पतये, हर-हर महादेव।
पीएम मोदी ने किया तमिलनाडु दौरे का जिक्र
मोदी ने कहा- कुछ दिनों पहले मैं तमिलनाडु में था। मैं वहां एक हजार साल पुराने एक ऐतिहासिक गंगाईकोंडा चोलापुरम मंदिर गया था। ये मंदिर हमारे देश के महान और प्रसिद्ध राजा राजेंद्र चोल ने बनवाया था। उन्होंने उत्तर भारत से गंगाजल मंगवाकर उत्तर से दक्षिण को जोड़ा था। हजार साल पहले अपनी शिव भक्ति से राजेंद्र चोल ने एक भारत-श्रेष्ठ भारत का उद्घोष किया। आज काशी-तमिल संगमम जैसे प्रयासों से हम उसे आगे बढ़ा रहे हैं।












