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क्या अपर्णा की पार्टी में हो पाएगी वापसी, जानिए शिवपाल यादव ने क्या कहा

यूपी में सियासी समीकरण इस कदर बदल रहे हैं कि बीजेपी से ही राजनीति की शुरुआत करने वाले नेता भी अब बीजेपी से पीछा छुड़ाने की जुगत में लगे हैं… हाल के बयानों को देखा जाए तो सबसे बड़ा संकेत वरुण गांधी ने दिया है जो पीलीभीत से बीजेपी के सांसद हैं… अखिलेश यादव और उनकी पार्टी जिस तरह से 2024 चुनाव की तैयारियों में जुटी है उसे देखकर पार्टी के कई पुराने नेता पार्टी में वापसी की राह देख रहे हैं… इसमें सबसे बड़ा नाम बहु अपर्णा यादव का बताया जा रहा है…

शिवपाल सिंह यादव के तेवरों ने साफ कर दिया है कि अब वे पुराने फार्म में वापस आ गए हैं और सपा की जीत के लिए जी जान से जुट गए हैं… अपने ताजा बयान में शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि सपा कार्यकर्ता अब संघर्ष के रास्ते पर निकलेंगे और यह तय है कि लंका जलेगी… इस बयान का मतलब लोग अपने-अपने तरीके से निकाल रहे हैं… कोई कह रहा है कि अब शिवपाल सिंह यादव मुलायम सिंह के रुप में आ गए हैं और जिस तरह मुलायम सिंह यादव पार्टी को हर दांव-पेंच से बचाते थें…

ठीक उसी तरह शिवपाल सिंह यादव भी अब पार्टी को आगे ले जाने की भूमिका में आ गए हैं… इससे जहां एक ओर अखिलेश का कांन्फिडेंस लेवल हाई है वहीं दूसरी पार्टी कार्यकर्ताओं में भी नए जोश का प्रवाह बढ़ा है… इसी बीच पार्टी में पुराने नेताओं की वापसी की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है और चर्चा में सबसे पहला नाम परिवार की बहु अपर्णा यादव का है…

लेकिन मीडिया से बातचीत में वरुण गांधी के पार्टी में शामिल होने पर उनका पार्टी में स्वागत करने की बात कहने वाले शिवपाल बहु अपर्णा के पार्टी में वापसी पर चुप्पी क्यों साध लेते हैं ये सभी जानना चाहते हैं… हालांकि शिवपाल ने इसपर कुछ भी नहीं बोला और सिर्फ इतना ही कहा कि वो बहू हैं और परिवार के सुख-दुख में शामिल होती रही हैं… शिवपाल सिंह यादव ने इसके आगे कुछ भी नहीं बोला… लेकिन हालात ये बताते हैं कि पार्टी में अपर्णा की वापसी अखिलेश यादव खुले मन से नहीं चाहते हैं यही ख्याल शिवपाल सिंह यादव का भी है…

पार्टी के बुरे वक्त में शिवपाल सिंह यादव ने सपा छोड़कर अपनी पार्टी जरुर बना ली… लेकिन वो सपा की धूर विरोधी बीजेपी में शामिल नहीं हुए… इसके ठीक उलट जब पार्टी को अपर्णा यादव की जरुरत थी और जनता में परिवार के एक जुट रहने का संकते देना था उसी वक्त ऐन मौके पर उन्होंने सपा का दामन छोड़कर सपा की धुर विरोधी बीजेपी का दामन थाम लिया… इतना ही नहीं विधानसभा चुनाव के वक्त योगी आदित्यानाथ के साथ उनकी नजदीकियों के भी चर्चे खुब हुए… इससे परिवार की एकजुटता पर असर तो पड़ा ही साख ही पार्टी की भी खुब किरकिरी हुई…

ऐसे में जब तक मुलायम सिहं यादव थे तब तक तो अपर्णा के लिए पार्टी के दरवाजे खुले थें… लेकिन अब जब नेताजी नहीं हैं तो अखिलेश और शिवपाल दोनों ही उस वक्त की कड़वाहट को भूल नहीं पा रहे हैं इसलिए फिलहाल अपर्णा की पार्टी में वापसी मुश्किल ही लग रही है… एक सवाल के जबाब में शिवपाल सिहं यादव ने ये भी साफ कर दिया कि उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी को हटाने के लिए समाजवादी पार्टी अकेले ही काफी है. शिवपाल ने कहा कि उनका मकसद और टारगेट 2024 में बीजेपी को सत्ता से हटाना है और 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनावों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सूबे का मुख्यमंत्री बनाना है…

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