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12वीं के 300 छात्रों ने लिखी चीफ जस्टिस को चिट्ठी, CBSE का फैसला रदद् करने की मांग

CBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षा को लेकर केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों के विचार अलग-अलग हैं। केंद्र सरकार इसे जुलाई या अगस्त में करवाने की तैयारी में लग रही है, वहीं दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्य इस बात पर अड़े हुए हैं कि बिना वैक्सीनेशन के स्टूडेंट्स को एग्जाम के लिए न बुलाया जाए।

इसी कड़ी में मंगलवार को CBSE 12वीं क्लास के करीब 300 स्टूडेंट्स ने चीफ जस्टिस एनवी रमना को चिट्ठी लिखी है। अपने लेटर पिटीशन में इन स्टूडेंट्स ने कोरोना के बीच फिजिकल एग्जाम कराने का CBSE का फैसला रद्द करने की मांग की है। स्टूडेंट्स ने सुप्रीम कोर्ट से सरकार को असेसमेंट का वैकल्पिक तरीका तय करने का निर्देश देने की भी अपील की है।

छात्रों का कहना है कि देश में कोविड-19 के चलते कई स्टूडेंट्स ने अपने परिवार वालों को खोया है। ऐसे में इस समय फिजिकली परीक्षा कराना न सिर्फ लाखों छात्रों और टीचर्स की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि उनके परिवार वालों के लिए भी यह परेशानी का सबब है।

दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि बिना वैक्सीनेशन के 12वीं के स्टूडेंट्स को एग्जाम के लिए न बुलाया जाए। वहीं सिसोदिया ने पत्र में कहा कि छात्रों को बिना वैक्सीनेशन के परीक्षा के लिए न बुलाया जाय।

उन्होंने कहा कि कोवैक्सिन या कोवीशील्ड 17 से अधिक आयु वर्ग के बच्चों को दी जा सके, इसके लिए केंद्र सरकार एक्सपर्ट्स से राय ले। इसके लिए केंद्र को फाइजर कंपनी से भी बात करनी चाहिए।

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