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जल्द सुलझ सकता है धार की भोजशाला का विवाद, ज्ञानवापी की तरह होगा एएसआई सर्वे; इंदौर हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

उमाकांत त्रिपाठी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने धार भोजशाल को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट के फैसले के मुताबिक ज्ञानवापी की तरह ही धार की भोजशाला का भी सर्वे किया जाएगा। इस मुद्दे पर कोर्ट ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी ASI की टीम बनाने के आदेश दिए हैं।

6 हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट
ये सर्वे 5 एक्सपर्ट की टीम करेगी, इसके साथ ही इस टीम को 6 हफ्ते में रिपोर्ट कोर्ट को सौंपनी होगी। इससे पहले मामले में इंदौर हाईकोर्ट में 19 जनवरी को बहस हुई थी। तब सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने सर्वे की डेडलाइन 29 अप्रैल तक की दी है। हाईकोर्ट ने इस वैज्ञानिक सर्वे को GPR-GPS तरीके से करने के लिए कहा है।

क्या होता है जीपीआर
GPR यानी ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार जमीन के अंदर विभिन्न स्तरों की हकीकत जांचने की तकनीक है। इसमें रडार का उपयोग होता है। यह अदृश्य यानी छुपी वस्तुओं के विभिन्न स्तर, रेखाओं और संरचनाओं का माप लेता है। GPS सर्वे यानी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम के तहत भी सर्वे किया जाएगा। बिल्डिंग की उम्र पता करने के लिए कार्बन डेटिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल भी किया जाएगा। पूरे सर्वे की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई जाएगी।

क्या बोला हिंदू पक्ष
हिंदू पक्ष के वकील एडवोकेट विष्णुशंकर जैन ने बताया कि सर्वे दोनों पक्षों की मौजूदगी में होगा। इससे भोजशाला के मूल स्वरूप की सच्चाई सामने आ सकेगी। मामले की सुनवाई अब 29 अप्रैल को होगी। इससे पहले सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने 1 मई 2022 को इंदौर हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि हर मंगलवार को हिंदू भोजशाला में यज्ञ कर उसे पवित्र करते हैं और शुक्रवार को मुसलमान नमाज के नाम पर यज्ञ कुंड को अपवित्र कर देते हैं। इसे रोका जाए।

क्या है भोजशाला से जुड़ा विवाद
जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार भोजशाला राजा भोज ने बनवाई थी। यह यूनिवर्सिटी थी, जिसमें वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। मुस्लिम शासक ने इसे मस्जिद में परिवर्तित कर दिया था। इसके अवशेष प्रसिद्ध मौलाना कमालुद्दीन मस्जिद में देखे जा सकते हैं। यह भोजशाला के कैंपस में स्थित है जबकि देवी की प्रतिमा लंदन के म्यूजियम में रखी है।

भोजशाला में मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना करने की अनुमति है। शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने के लिए दोपहर 1 से 3 बजे तक प्रवेश दिया जाता है। इसके लिए दोनों पक्षों को फ्री एंट्री मिलता है। बाकी दिनों में 1 रुपए का टिकट लगता है। इसके अलावा वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के लिए हिंदू पक्ष को पूरे दिन पूजा और हवन करने की अनुमति है।

साल 2006, 2012 और 2016 में शुक्रवार को वसंत पंचमी आई तो विवाद की स्थिति बनी। वसंत पंचमी पर हिंदू पक्ष को पूजा जबकि शुक्रवार होने से मुस्लिमों को नमाज की अनुमति भी है। ऐसे में वसंत पंचमी शुक्रवार को आने पर समझाइश के बीच पूजा और नमाज दोनों करवाए जाते हैं। अगली बार ऐसी स्थिति 2026 में बन सकती है।

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