उमाकांत त्रिपाठी। उत्तराखंड के देहरादून में संस्कृति एवं कला महोत्सव का आयोजन होने वाला है। आपको बता दें कि 25 अक्टूबर से संस्कृति एवं कला महोत्सव के महा सम्मेलन की शुरुआत होगी। इसमें देश के पूर्व राष्ट्रपति और उत्तराखंड के राज्यपाल मुख्य अतिथि होंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ , केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र शेखावत, अजय टम्टा, यूनिवर्सिटीज के कुलपति, देश-विदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकार भी शामिल होंगे। इस आयोजन से पहले दो दिन दो दिन की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में देश के दिग्गज साहित्यकार, विद्वान, और संस्कृति प्रेमी शामिल हुए। कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) और लेखक ग्राम ने किया।

पूर्व केंद्रीय शिक्षामंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने इस आयोजन की कामयाबी की कामना करते हुए सभी का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि, उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में ये आयोजन बहुत जरुरी भूमिका निभाएगा। उन्होंने लोगों से इस साहित्यिक यात्रा का हिस्सा बनने और इस आयोजन में शामिल होने की अपील की है।

इस आयोजन का मकसद उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक धरोहर को जीवंत रखना और उभरते लेखकों को प्रेरित करना है। पहले दिन की कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि और पूर्व निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. सविता मोहन ने किया। इस दौरान उन्होंने साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और सशक्त करने की बात की। आयोजन से पहले हुई कार्यशाला में मुख्य वक्ता डॉ. हटवाल ने हिंदी और भारतीय भाषाओं की वर्तमान स्थिति, उनके विकास और वैश्विक परिदृश्य में उनकी भूमिका पर चर्चा की। पहले सत्र में हिंदी और स्थानीय भाषाओं के लेखकों की कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें रचनात्मकता और लेखन की प्रक्रिया पर मंथन हुआ। दूसरा सत्र दोपहर में आयोजित हुआ इसमें समकालीन साहित्य और लेखन की नई संभावनाओं पर बारीकी से बात की गई।

25 अक्टूबर को होने वाले आयोजन में इनमें प्रवासी साहित्यकार डॉ. मोहनकांत गौतम, तेजेंद्र शर्मा, नीलम जैन, जया वर्मा के नाम शामिल हैं। इस महासम्मेलन में प्रसिद्ध लेखक ममता कालिया, डॉ. अनामिका, बद्री नारायण, डॉ. लक्ष्मी शंकर बाजपेयी, बुद्धिनाथ मिश्र और अन्य दिग्गज साहित्यकार भी अपने अनुभव बताएंगे। इस महासम्मेलन में प्रसिद्ध नृत्यांगना सोनल मानसिंह की प्रस्तुति, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की नाटक ‘माई रे मैं का से कहूँ’, और ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम भी होंगे।

आपको बता दें कि हिमालयन विश्वविद्यालय और स्पर्श हिमालय फाउंडेशन इस महा सम्मेलन के आयोजन का मुख्य सहयोगी हैं।













