उमाकांत त्रिपाठी।बीजिंग: चीन के तिनजियान में हो रही शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक से भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने साफ किया है कि आतंक के मुद्दे पर कोई ढील या दोहरा रवैया दिल्ली को कबूल नहीं है। इतना ही नहीं चीन और पाकिस्तान के सीपीईसी प्रोजेक्ट पर भी मोदी ने अपना एतराज साफ-साफ जता दिया है। मोदी ने शी जिनपिंग और शहबाज शरीफ की मौजूदगी में कहा कि किसी परियोजना में दूसरे देश की संप्रभुता का ख्याल रखना जरूरी है। ऐसा ना होने पर प्रोजेक्ट का कोई मतलब नहीं रह जाता है।
पीएम मोदी ने चीन के तियानजिन में एससीओ के सत्र में कहा,कि- संप्रभुता को दरकिनार करने वाली कनेक्टिविटी विश्वास और अर्थ खो देती है। भारत का मानना रहा है कि मजबूत कनेक्टिविटी ना केवल व्यापार को बढ़ावा देती है। यह विकास और विश्वास के द्वार खोलती है। इसको ध्यान में रखते हुए हम चाबहार बंदरगाह और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे पर काम कर रहे हैं। इससे हमें अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ कनेक्टिविटी में मदद मिलेगी।
जानिए- चीन-पाकिस्तान का संदेश!
पीएम मोदी ने अपने भाषण में सीधेतौर पर पाकिस्तान, चीन या चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का नाम नहीं लिया। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि इस प्रोजेक्ट को पीओके में चलाए जाने जाने से भारत खुश नहीं है। उन्होंने भारत का उदाहरण देकर एक तरह से पाकिस्तान और चीन को सीख लेने की सलाह दे डाली। उन्होंने शरीफ और जिनपिंग को बताया कि भारत कैसे किसी की संप्रुभता में दखल के बिना एक बड़ा प्रोजेक्ट चला रहा है।भारत की ओर से लगातार सीपीईसी का विरोध किया गया है। इसकी वजह इसका पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरना है। भारत का कहना है कि पीओके उसका हिस्सा है और पाकिस्तान का इस क्षेत्र पर कब्जा अवैध है। ऐसे में चीन का यहां आकर बड़े स्तर पर निर्माण करना पूरी तरह गलत है। भारत के लिए इस क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान की मौजूदगी सैन्य और सुरक्षा के लिहाज से भी चुनौती पैदा करती है। इसलिए सीपीईसी पर भारत की चिंता है।














