खबर इंडिया की। राजधानी भोपाल से सटे प्राचीन भोजपुर मंदिर में एक नवविवाहित युवक को वरमाला की रस्म करने से रोकने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में युवक खुद को भूपेंद्र शर्मा बताते हुए आरोप लगा रहा है कि उसे मंदिर परिसर में वरमाला करने से रोका गया और अनुमति लेने की बात कही गई।
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युवक का कहना है कि वह विधिवत शादी के बाद सिर्फ दो से तीन मिनट के लिए भगवान शिव के सामने प्रतीकात्मक वरमाला और दर्शन करने पहुंचा था। उसके अनुसार ढोल, कैमरा और वाहन को गेट पर ही रोक दिया गया, जिसे उन्होंने मान लिया। वे गर्भगृह में प्रवेश किए बिना परिसर में करीब 30 सेकंड में रस्म पूरी कर बाहर आ गए।
वीडियो में युवक कहते दिख रहा है, “पूजा से मना नहीं कर रहा है, वरमाला से मना कर रहा है। भगवान के मंदिर में भी परमिशन लेनी पड़े तो काहे का मंदिर?” वहीं सुरक्षाकर्मी ‘सेंट्रल मोन्यूमेंट’ और ‘आर्किलॉजिकल’ से अनुमति लेने की बात करते सुनाई देते हैं। अंत में युवक “हर हर महादेव” के नारे लगाते हुए युवती के गले में माला डाल देता है।
मंदिर के पुजारी अनूप गिरी ने स्पष्ट किया कि भोजपुर मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन संरक्षित स्मारक है। ऐसे में किसी भी प्रकार के आयोजन के लिए विभागीय अनुमति आवश्यक हो सकती है। मंदिर ट्रस्ट की ओर से कोई आपत्ति नहीं है।
पुरातत्व अधिकारियों का कहना है कि भोजपुर मंदिर, सांची, खजुराहो, भीमबेटका और उदयगिरि जैसे स्मारक केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित हैं और बिना पूर्व अनुमति किसी भी सार्वजनिक रस्म, शूट या आयोजन की अनुमति नहीं है।
अब सवाल यही है—क्या कुछ सेकंड की वरमाला भी ‘आयोजन’ मानी जाएगी?














