खबर इंडिया की।बीयर के गिलास में मूंगफली डालने के बाद अगर आपने उसे गौर से देखा है, तो शायद एक बेहद दिलचस्प नजारा देखने को मिला होगा। मूंगफली पहले गिलास के नीचे चली जाती है, लेकिन कुछ देर बाद अचानक ऊपर उठने लगती है। सतह तक पहुंचने के बाद वह फिर नीचे जाती है और कुछ समय बाद दोबारा ऊपर आ जाती है। यह प्रक्रिया कई बार दोहराई जा सकती है। देखने में ऐसा लगता है जैसे मूंगफली बीयर के गिलास में सचमुच ‘डांस’ कर रही हो। इसी दिलचस्प घटना को Beer Peanut Dance कहा जाता है।
हालांकि इसके पीछे न तो कोई जादू है और न ही बीयर में मौजूद कोई रहस्यमयी तत्व। इसके पीछे साधारण लेकिन बेहद रोचक भौतिक विज्ञान काम करता है। बीयर में घुली कार्बन डाइऑक्साइड गैस, मूंगफली की सतह और उछाल यानी buoyancy मिलकर ऐसा प्रभाव पैदा करते हैं, जिसकी वजह से मूंगफली बार-बार ऊपर और नीचे जाती दिखाई देती है।
पहले गिलास के नीचे क्यों चली जाती है मूंगफली?
जब साबुत, भुनी और छिली हुई मूंगफली को बीयर में डाला जाता है, तो वह आमतौर पर शुरुआत में सीधे नीचे चली जाती है। इसका सबसे आसान कारण उसका घनत्व है।
किसी वस्तु का बीयर की तुलना में अधिक घना होना उसे नीचे जाने की प्रवृत्ति देता है। शुरुआत में मूंगफली के साथ ऐसा ही होता है। उस समय उसकी सतह पर पर्याप्त संख्या में गैस के बुलबुले नहीं होते, इसलिए उसका वजन और घनत्व उसे नीचे की ओर ले जाता है।
लेकिन गिलास के नीचे पहुंचने के बाद कहानी बदलनी शुरू होती है। बीयर में घुली कार्बन डाइऑक्साइड धीरे-धीरे छोटे-छोटे बुलबुलों के रूप में बाहर निकलती है। मूंगफली की सतह इन बुलबुलों के लिए एक तरह की जगह उपलब्ध कराती है, जहां वे चिपक सकते हैं।
यहीं से शुरू होता है Beer Peanut Dance का असली खेल।
कार्बन डाइऑक्साइड के बुलबुले मूंगफली को ऊपर कैसे उठाते हैं?
बीयर में कार्बन डाइऑक्साइड गैस घुली रहती है। जब बीयर को बोतल या कैन से निकालकर गिलास में डाला जाता है, तो दबाव में बदलाव के कारण गैस धीरे-धीरे बाहर निकलने लगती है। यही गैस छोटे बुलबुले बनाती है।
मूंगफली की सतह पर जैसे-जैसे ये बुलबुले जमा होते हैं, मूंगफली और उससे चिपके बुलबुलों का संयुक्त प्रभाव बदल जाता है। बुलबुले मूंगफली को अतिरिक्त उछाल देते हैं। आसान भाषा में कहें तो मूंगफली की सतह से चिपकी गैस उसे ऊपर की तरफ जाने में मदद करती है।
जब पर्याप्त बुलबुले मूंगफली से चिपक जाते हैं, तो ऊपर की ओर लगने वाला buoyant force इतना बढ़ सकता है कि मूंगफली नीचे टिके रहने के बजाय ऊपर की ओर उठने लगती है।
यही कारण है कि कुछ समय बाद गिलास के तल पर पड़ी मूंगफली अचानक ऊपर की ओर जाती दिखाई देती है। यह Beer Peanut Dance का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।
ऊपर पहुंचते ही मूंगफली फिर नीचे क्यों जाती है?
अब सवाल यह है कि अगर बुलबुले मूंगफली को ऊपर उठा रहे हैं तो वह ऊपर पहुंचने के बाद वहीं क्यों नहीं रहती?
इसका जवाब भी बुलबुलों में ही छिपा है।
जब मूंगफली बीयर की सतह के करीब पहुंचती है या सतह पर आती है, तो उससे चिपके कई गैस बुलबुले टूटने लगते हैं। कुछ बुलबुले सतह पर पहुंचकर गैस को वातावरण में छोड़ देते हैं। मूंगफली के घूमने या पलटने से उसकी सतह के दूसरे हिस्सों पर चिपके बुलबुले भी अलग हो सकते हैं।
जैसे-जैसे बुलबुलों की संख्या कम होती है, मूंगफली को मिलने वाला अतिरिक्त उछाल भी कम हो जाता है। इसके बाद मूंगफली फिर से बीयर की तुलना में प्रभावी रूप से भारी हो जाती है और नीचे की ओर जाने लगती है।
लेकिन नीचे जाते ही उसके साथ फिर वही प्रक्रिया शुरू हो जाती है। बीयर में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड के नए बुलबुले उसकी सतह पर चिपकते हैं। बुलबुले पर्याप्त संख्या में जमा होते हैं तो मूंगफली को दोबारा ऊपर की ओर धकेलने वाला उछाल बढ़ जाता है।
इस तरह मूंगफली का ऊपर जाना, बुलबुलों का टूटना और फिर नीचे आना लगातार दोहराया जा सकता है।
Beer Peanut Dance हमेशा क्यों नहीं चलता?
मूंगफली का यह अनोखा डांस हमेशा जारी नहीं रहता। इसका सबसे बड़ा कारण बीयर में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा है।
गिलास में बीयर कुछ समय तक खुली रहने के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड लगातार बाहर निकलती रहती है। जैसे-जैसे घुली हुई गैस की मात्रा कम होती जाती है, नए बुलबुले बनने की प्रक्रिया भी कमजोर पड़ने लगती है।
एक समय ऐसा आता है जब मूंगफली की सतह पर इतने बुलबुले जमा नहीं हो पाते कि उसे फिर से ऊपर उठा सकें। तब उसका ऊपर-नीचे होना रुक जाता है और आखिरकार वह गिलास के नीचे बैठ जाती है।
यानी Beer Peanut Dance को चलाने के लिए तीन चीजों का तालमेल महत्वपूर्ण है—मूंगफली का घनत्व, बीयर में घुली कार्बन डाइऑक्साइड और बुलबुलों से मिलने वाला अतिरिक्त उछाल।
हर बीयर और हर मूंगफली में एक जैसा असर क्यों नहीं दिखता?
यह जरूरी नहीं है कि हर बीयर के गिलास में मूंगफली बिल्कुल इसी तरह लंबे समय तक ऊपर-नीचे होती रहे। इसका असर कई परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है।
बीयर में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा, तापमान, गिलास की स्थिति और मूंगफली की सतह की बनावट जैसे कारक इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। मूंगफली का आकार और उसका घनत्व भी मायने रखता है।
अगर मूंगफली की सतह पर बुलबुले आसानी से चिपकते हैं, तो उसे ऊपर उठने में मदद मिल सकती है। वहीं, अगर बुलबुले पर्याप्त संख्या में नहीं बनते या जल्दी टूट जाते हैं, तो यह प्रभाव कम दिखाई दे सकता है।
इसी वजह से किसी गिलास में मूंगफली कुछ बार ऊपर-नीचे होती दिखाई दे सकती है, जबकि किसी दूसरे गिलास में यह प्रक्रिया बहुत कम नजर आए।
यह घटना विज्ञान को समझने का आसान उदाहरण है
Beer Peanut Dance देखने में भले ही एक मजेदार ट्रिक जैसा लगता हो, लेकिन यह रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देने वाले विज्ञान का शानदार उदाहरण है। इसमें घनत्व, गैस के बुलबुले और buoyancy जैसे भौतिक विज्ञान के सिद्धांत एक साथ दिखाई देते हैं।
दरअसल, यही वजह है कि यह घटना वैज्ञानिकों और विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी दिलचस्प रही है। किसी प्रयोगशाला की जटिल मशीन के बजाय एक साधारण गिलास, बीयर और मूंगफली से यह समझा जा सकता है कि गैस के छोटे-छोटे बुलबुले किसी ठोस वस्तु के व्यवहार को किस तरह बदल सकते हैं।
तो अगली बार अगर आपको बीयर के गिलास में मूंगफली ऊपर-नीचे होती दिखाई दे, तो इसे महज संयोग या कोई जादुई करतब न समझें। यह Beer Peanut Dance है—जहां मूंगफली का नीचे जाना उसके घनत्व से जुड़ा है, ऊपर उठना बुलबुलों से मिलने वाले उछाल से और दोबारा नीचे आना बुलबुलों के सतह पर पहुंचकर खत्म होने से।














