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चीनी राष्ट्रपति 7 साल बाद भारत आए, पीएम मोदी ने जिनपिंग संग की द्विपक्षीय बैठक, दोनों नेताओं ने ये कहा

खबर इंडिया की।दिल्ली में चल रहे BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं की यह मुलाकात करीब 50 मिनट तक चली। बैठक में भारत और चीन के बीच संबंधों, आपसी सहयोग और भविष्य की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। PM Modi Xi Jinping Meeting ऐसे समय हुई है, जब दोनों देशों के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण तनावपूर्ण रहे हैं।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों को एक-दूसरे के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और आपसी हित के तीन मूल सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहिए। दोनों नेताओं ने यह भी माना कि देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इन मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए।

शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आए हैं। गलवान घाटी में 2020 में हुई हिंसक झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। ऐसे में PM Modi Xi Jinping Meeting को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

मोदी ने कहा- मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चीन की ओर से मिले समर्थन और सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का यह महत्वपूर्ण अवसर है।

पीएम मोदी ने शी जिनपिंग का भारत में स्वागत करते हुए दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच संबंध तीन पारस्परिक सिद्धांतों- सम्मान, संवेदनशीलता और हित पर आधारित होने चाहिए।

दोनों नेताओं के बीच इस बात पर भी सहमति बनी कि भारत और चीन के बीच मौजूद मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने दिया जाना चाहिए। साथ ही दोनों देशों के संबंधों को लंबे समय तक स्थिर और बेहतर बनाए रखने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।

यह संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गलवान घटना के बाद भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव बढ़ गया था। हालांकि, राजनीतिक और सैन्य स्तर पर तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार जारी रहा।

शी जिनपिंग बोले- एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं

बैठक के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि चीन ने हमेशा भारत के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाए रखने का समर्थन किया है।

जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन इसके बावजूद भारत और चीन एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं।

शी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं। सीमा विवाद के बाद दोनों देशों ने कई स्तरों पर बातचीत की है। ऐसे में दिल्ली में हुई PM Modi Xi Jinping Meeting से द्विपक्षीय संबंधों में आगे की संभावनाओं को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।

गलवान के बाद भी दोगुना हुआ चीन से भारत का आयात

भारत और चीन के रिश्तों में 2020 के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला। 15 जून 2020 को गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव काफी बढ़ गया।

हालांकि, सीमा विवाद का असर दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर उतना नहीं पड़ा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 में चीन से भारत का आयात करीब 65 अरब डॉलर था। वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 132 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया।

यानी गलवान झड़प के बाद के वर्षों में चीन से भारत का आयात लगभग दोगुना हो गया। इससे साफ है कि राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

2019 में महाबलीपुरम में हुई थी मोदी-जिनपिंग की मुलाकात

भारत में मोदी और जिनपिंग की पिछली महत्वपूर्ण मुलाकातों की बात करें तो वर्ष 2019 में दोनों नेता तमिलनाडु के महाबलीपुरम पहुंचे थे।

अक्टूबर 2019 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत तमिलनाडु के ऐतिहासिक तटीय शहर मामल्लपुरम में किया था। दोनों नेताओं ने पंच रथ और शोर मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया था।

इस दौरान दोनों नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत भी हुई थी। भारत-चीन व्यापार घाटे को कम करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और सीमा पर शांति बनाए रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

2016 में गोवा BRICS Summit में साथ दिखे थे मोदी-जिनपिंग

मोदी और जिनपिंग की एक चर्चित मुलाकात वर्ष 2016 में गोवा में हुए BRICS Summit के दौरान हुई थी।

15 अक्टूबर 2016 को BRICS Summit से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक साथ नजर आए थे। इस दौरान तीनों नेताओं की तस्वीरें भी काफी चर्चा में रही थीं।

अब करीब एक दशक बाद BRICS के मंच पर ही भारत और चीन के शीर्ष नेताओं की द्विपक्षीय बैठक ने फिर से दोनों देशों के संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

2014 में अहमदाबाद में दिखी थी मोदी-जिनपिंग की गर्मजोशी

प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की शुरुआती चर्चित मुलाकातों में वर्ष 2014 की अहमदाबाद यात्रा भी शामिल है। सितंबर 2014 में चीनी राष्ट्रपति अपनी भारत यात्रा के दौरान सबसे पहले गुजरात पहुंचे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल से अलग हटकर दिल्ली के बजाय अहमदाबाद में उनका स्वागत किया था। साबरमती नदी के किनारे दोनों नेताओं की साथ में झूला झूलते हुए तस्वीरें काफी चर्चित हुई थीं।

उस समय दोनों देशों के बीच रिश्तों को लेकर सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा था। हालांकि, इसके बाद सीमा से जुड़े मुद्दों ने भारत-चीन संबंधों को प्रभावित किया और 2020 की गलवान घटना के बाद तनाव और बढ़ गया।

अब आगे क्या?

दिल्ली में हुई PM Modi Xi Jinping Meeting ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन दोनों ही अपने संबंधों को एक स्थिर दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। बैठक में मतभेदों को विवाद में न बदलने और एक-दूसरे के हितों तथा संवेदनशीलताओं का सम्मान करने पर जोर दिया गया।

अब इस मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग और सीमा से जुड़े मुद्दों पर आगे की बातचीत किस दिशा में बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी। करीब सात साल बाद शी जिनपिंग का भारत दौरा और मोदी के साथ उनकी 50 मिनट की बैठक भारत-चीन संबंधों के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

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