उमाकांत त्रिपाठी।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के UCC 2029 को लेकर किए गए ऐलान के बाद देश की सियासत गरमा गई है। अमित शाह ने रविवार को दावा किया कि लोकसभा चुनाव 2029 से पहले बीजेपी और NDA शासित सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC लागू कर दिया जाएगा। उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों के साथ-साथ NDA में शामिल कुछ सहयोगी दलों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
बिहार में बीजेपी की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता श्याम रजक ने UCC को लेकर पार्टी के पुराने रुख को दोहराया। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने अमित शाह के बयान पर सवाल उठाते हुए इसे महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों से जोड़कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
JDU नेता श्याम रजक बोले- पुराने स्टैंड पर कायम
UCC पर अमित शाह के बयान को लेकर JDU नेता श्याम रजक ने कहा कि जब यह बिल संसद में आया था, तब पार्टी के नेता नीतीश कुमार ने अपना रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी बिल का समर्थन करती है, लेकिन इसे बिहार में लागू नहीं होने देगी।
श्याम रजक ने कहा, “जब यह बिल संसद में आया था, तो हमारे नेता नीतीश कुमार ने साफ-साफ कहा था कि वह बिल का समर्थन तो करते हैं, लेकिन इसे अपने राज्य में लागू नहीं होने देंगे। हम आज भी अपनी उस बात पर कायम हैं।”
JDU नेता के इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बिहार में JDU और बीजेपी NDA गठबंधन का हिस्सा हैं। ऐसे में केंद्र की ओर से सभी NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की बात और बिहार में JDU के पुराने रुख के बीच राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।
इमरान मसूद ने UCC को बताया वोट बैंक की राजनीति
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने UCC को लेकर कहा कि देश में अलग-अलग समुदाय अपनी परंपराओं को मानते हैं और केवल कानून में बदलाव से इस मुद्दे का समाधान नहीं होगा।
इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि UCC का मुद्दा वोट बैंक की राजनीति के लिए उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि UCC लागू हो या नहीं, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। उनके मुताबिक भारत परंपराओं वाला देश है और लोग अपनी परंपराओं का पालन करेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे मौजूद हैं, तो उन पर बात करने के बजाय दूसरे मुद्दों को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है।
राशिद अल्वी ने भी केंद्र सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने भी UCC को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि क्या यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने से देश की आर्थिक स्थिति सुधर जाएगी? क्या इससे बेरोजगारी खत्म होगी या पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी आएगी?
राशिद अल्वी ने कहा कि बीजेपी पिछले कई वर्षों से मुसलमानों से जुड़े मुद्दों को अपने राजनीतिक एजेंडे में शामिल करती रही है। उन्होंने UCC के साथ ट्रिपल तलाक, मस्जिद-मंदिर और हिंदू-मुसलमान जैसे मुद्दों का जिक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता बेरोजगारी और आर्थिक स्थिति जैसे सवाल नहीं हैं। अल्वी ने यह भी कहा कि UCC को 21 राज्यों में लागू करने की बात इसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है।
अमित शाह ने क्या कहा था?
दरअसल, अमित शाह ने रविवार को UCC को लेकर बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव 2029 से पहले बीजेपी और NDA शासित सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कर दिया जाएगा।
गृह मंत्री के मुताबिक, कई राज्यों में UCC पहले ही लागू किया जा चुका है। वहीं NDA शासित बाकी राज्यों में अगले दो से तीन वर्षों के दौरान इसे लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।
अमित शाह के इस बयान के बाद UCC एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के बड़े मुद्दों में शामिल हो गया है। एक तरफ बीजेपी इसे समान नागरिक कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल इसके उद्देश्य और प्राथमिकता पर सवाल उठा रहे हैं।
सबसे अहम बात यह है कि UCC को लेकर NDA के भीतर भी अलग-अलग राज्यों और सहयोगी दलों की अपनी स्थिति है। ऐसे में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 21 राज्यों में इसे लागू करने का लक्ष्य केंद्र और राज्यों के बीच राजनीतिक और नीतिगत चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है।















