खबर इंडिया की।मध्य प्रदेश में करीब दो दशक बाद एक बार फिर सरकारी पहल वाली बस परिवहन सेवा शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव 25 सितंबर को CM सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत करेंगे। हालांकि इस बार सरकार खुद बसों का संचालन नहीं करेगी, बल्कि सेवा को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर चलाया जाएगा।
नई व्यवस्था के पहले चरण में 7 शहरों से कुल 351 बसें शुरू की जाएंगी। इनमें 120 बसें अंतर-शहरी यानी एक शहर से दूसरे शहर के बीच चलेंगी, जबकि बाकी बसों का इस्तेमाल शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन के लिए किया जाएगा।
सरकार ने इस सेवा को आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर विस्तार देने की योजना बनाई है। लक्ष्य है कि वर्ष 2031 तक प्रदेश में 15 हजार बसें संचालित हों और इनके जरिए रोजाना करीब 30 लाख यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
20 साल पहले बंद हो गया था MPSRTC
मध्य प्रदेश में कभी सरकारी बस परिवहन का बड़ा नेटवर्क हुआ करता था। मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम यानी MPSRTC के जरिए प्रदेश के शहरों के साथ-साथ जिलों, तहसीलों और ग्रामीण क्षेत्रों को भी बस सेवा से जोड़ा जाता था।
अपने बेहतर दौर में MPSRTC के पास करीब 2,700 बसों का बेड़ा था। ये बसें सिर्फ अंतर-जिला और ग्रामीण रूट पर ही नहीं चलती थीं, बल्कि शहरों में स्कूली परिवहन जैसी सेवाओं में भी इस्तेमाल होती थीं।
समय के साथ निगम की आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति कमजोर होती गई। बस संचालन, परमिट और अन्य मामलों को लेकर राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आते रहे। इसके बाद निगम का नेटवर्क लगातार सिमटता गया।
साल 2005 में MPSRTC आधिकारिक तौर पर बंद हो गया। उस समय तक निगम के पास बसों की संख्या घटकर करीब 850 रह गई थी। इसके बाद प्रदेश में सार्वजनिक सड़क परिवहन की जिम्मेदारी मुख्य रूप से निजी ऑपरेटरों के पास चली गई।
अब PPP मॉडल पर चलेगी नई बस सेवा
करीब 20 साल बाद सरकार अब सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नए मॉडल के साथ वापस ला रही है। CM सुगम परिवहन सेवा में बसों का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत होगा।
इस व्यवस्था में बसें निजी ऑपरेटर उपलब्ध कराएंगे। सरकार की भूमिका सेवा के प्रबंधन, रूट, निगरानी और परिवहन व्यवस्था को नियंत्रित करने की होगी।
निजी ऑपरेटरों को बसों पर विज्ञापन के जरिए कमाई करने का अवसर भी मिलेगा। यानी सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर प्रदेश में सार्वजनिक बस परिवहन का नेटवर्क तैयार करेंगे।
सात शहरों से शुरू होगी सेवा
पहले चरण में नई बस सेवा को प्रदेश के सात शहरों से शुरू किया जाएगा। इसके लिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, भिंड, कटनी और देवास में अलग-अलग कंपनियों का मुख्यालय बनाया गया है।
नई व्यवस्था के लिए एक होल्डिंग कंपनी MP Passenger Transport Management Limited बनाई गई है। इसके तहत सात अलग-अलग कंपनियां काम करेंगी।
इन कंपनियों के जरिए संबंधित क्षेत्रों में बस संचालन और परिवहन व्यवस्था को मैनेज किया जाएगा।
351 बसों से होगी शुरुआत
CM सुगम परिवहन सेवा के पहले चरण में कुल 351 बसें सड़क पर उतारी जाएंगी। इनमें:
- 120 बसें अंतर-शहरी सेवाओं के लिए
- बाकी बसें शहरों के भीतर संचालित होंगी
- बसों का संचालन निजी ऑपरेटर करेंगे
- रूट और संचालन की निगरानी सरकार के सिस्टम से होगी
सरकार का लक्ष्य आगे चलकर इस नेटवर्क को काफी बड़ा करना है।
2031 तक 15 हजार बसें चलाने का लक्ष्य
सरकार की योजना सिर्फ 351 बसों तक सीमित नहीं है। वर्ष 2031 तक 15 हजार बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार के मुताबिक, इस बड़े नेटवर्क के जरिए रोजाना करीब 30 लाख यात्रियों को परिवहन सुविधा देने का लक्ष्य है।
इसके साथ ही प्रदेश में करीब 180 आधुनिक बस स्टॉप विकसित करने की योजना भी बनाई गई है। इन बस स्टॉप को नई परिवहन व्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
गांवों तक भी बस सेवा पहुंचाने की योजना
नई परिवहन व्यवस्था का फोकस केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों को भी बस नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
वर्ष 2031 तक मध्य प्रदेश की 20 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों में से करीब दो-तिहाई ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने की योजना है।
अगर यह लक्ष्य पूरा होता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जिला मुख्यालय, तहसील और शहरों तक आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का बेहतर विकल्प मिल सकता है।
इलेक्ट्रिक बसों को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार भविष्य की परिवहन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक बसों को भी बढ़ावा देने की योजना बना रही है।
इससे सार्वजनिक परिवहन में पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकेगा। हालांकि इलेक्ट्रिक बसों की संख्या और उनके रूट को लेकर आगे की योजना के अनुसार विस्तार किया जाएगा।
IT सिस्टम से होगी बसों की निगरानी
नई बस सेवा की एक बड़ी खासियत इसका Intelligent Transport Management System (ITMS) होगा। इसके जरिए बसों के संचालन की निगरानी तकनीक के माध्यम से की जाएगी।
एक Command and Control Centre बनाया जाएगा, जहां से बसों की लोकेशन, रूट, समय पर संचालन और रफ्तार जैसी जानकारी पर नजर रखी जाएगी।
इससे यात्रियों को बसों की स्थिति और संचालन से जुड़ी जानकारी बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। साथ ही सरकार के लिए अलग-अलग रूट पर बसों के संचालन की निगरानी करना आसान होगा।
निजी बस ऑपरेटरों की होगी अहम भूमिका
नई व्यवस्था में निजी बस ऑपरेटरों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। वे बसें उपलब्ध कराएंगे और तय व्यवस्था के अनुसार उनका संचालन करेंगे।
सरकार का मॉडल ऐसा रखा गया है जिसमें सार्वजनिक परिवहन का नियमन और निगरानी सरकारी सिस्टम के जरिए होगी, जबकि बसों के संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी रहेगी।
इस तरह करीब 20 साल बाद मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को एक नए मॉडल के जरिए दोबारा विस्तार देने की कोशिश की जा रही है।
क्या बदला है?
पुराने MPSRTC मॉडल में राज्य सरकार का अपना सड़क परिवहन निगम और उसका बस बेड़ा था। 2005 में निगम बंद होने के बाद प्रदेश में सार्वजनिक बस परिवहन का सरकारी नेटवर्क खत्म हो गया था।
अब CM सुगम परिवहन सेवा के जरिए सरकार सार्वजनिक परिवहन में वापस आ रही है, लेकिन इस बार मॉडल अलग है। बसें निजी ऑपरेटर उपलब्ध कराएंगे, जबकि सरकार IT सिस्टम, रूट मैनेजमेंट और निगरानी के जरिए व्यवस्था को संचालित करेगी।














