एक ऐसी दर्दनाक खबर जिसपर यकीन कर पाना मुश्किल है। पर यह सच्चाई आपको जाननी चाहिए। कोरोना के इस विकराल दैत्य ने परिवार को इस कदर एक दूसरे से दूर कर दिया है कि लोग अपने पिता को भी नहीं पहचान रहें। जी हां बिल्कुल सच है ये बात।
दिल्ली से एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है जहां कोरोना के खौफ के चलते एक बुजुर्ग को उनके अपनों ने ही उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया। लेकिन ऐसे मुश्किल वक्त ने दिल्ली पुलिस ने मानवता की मिसाल पेश की। दिल्ली पुलिस के एक कॉन्स्टेबल ने बुजुर्ग की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई और उन्हें किसी तरह घर से निकाल कर अस्पताल में भर्ती कराया।
बताया जा रहा है कि रविवार की सुबह करीब 11 बजे ओल्ड राजेंद्र नगर में रहने वाले एक बुजुर्ग शख्स की बेटी ने पीसीआर पर कॉल करके बताया कि उसके पिता की तबीयत खराब है और उन्हें कुछ दिनों से बुखार है। साथ में ये भी कह दिया कि उसे डर है कि शायद उन्हें कोरोना हो गया है और इसी वजह से वह उनके पास नहीं जाना चाहती है।
इसके बाद तत्काल राजेंद्र नगर थाने में तैनात कॉन्स्टेबल राजू राम बताए गए पते पर पहुंचे, तो घर के बाहर लगा एक पोस्टर को देखकर उनके आंखों में आंसु आ गए। पोस्टर पर लिखा था कि अगर उनकी मौत हो जाए, तो उनकी लाश पुलिस के सुपुर्द कर दी जाए।
तहकीकात में सामने निकल कर आया कि इस घर के थर्ड फ्लोर पर रहने वाले मुरलीधर सीआईडी ऑफिसर रह चुके हैं। उनकी तीन बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी हैं। उनमें से दो बेटियां दिल्ली में और एक बाहर रहती हैं। कालकाजी में रहने वाली उनकी बेटी ने पुलिस को कॉल करके उनके बारे में सूचना दी थी।
कॉन्स्टेबल राजू राम ने बुजुर्ग को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई। पर उन्होंने जाने से मना कर दिया। फिर राजू ने अपने साथी कॉन्स्टेबल प्रदीप को फोन करके बुलाया और दोनों पुलिसवाले पीपीई किट पहनकर ऊपर गए। काफी समझाने के बाद मुरलीधर अस्पताल जाने के लिए राजी हुए, जिसके बाद कॉन्स्टेबल राजू ने दोबारा से एंबुलेंस बुलाई और उन्हें आरएमएल हॉस्पिटल ले गए।
फिर पुलिस ने उनकी बेटी को फोन करके बता दिया कि उनके पिता को अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है। इस पर उनकी बेटी ने भी पुलिसवालों का शुक्रिया अदा किया।















