उमाकांत त्रिपाठी। बजट सत्र के दूसरे फेज के पांचवें दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ को लेकर संसद को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राम मंदिर का जिक्र भी किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि- पिछले वर्ष अयोध्या में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा में देखा था कि कैसे देश अगले 1000 साल के लिए तैयार हो रहा है। एक साल बाद महाकुंभ के आयोजन ने ये दिखा दिया है। देश की सामूहिक चेतना, देश का सामर्थ्य बताती है। मानव जीवन और देश के लिए कई ऐसे अवसर आते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण बन जाते हैं। हमारे लिए भी ऐसे पल आए हैं, जब देश को झकझोर कर एक कर दिया गया।
महाकुंभ नए संकल्प की तरफ ले गया
पीएम ने सदन में कहा कि- महाकुंभ जैसे आयोजन राष्ट्रीय चेतना, राष्ट्र को नए संकल्पों की तरफ ले जाते हैं, ये उनकी सिद्धि के लिए प्रेरित करती है। महाकुंभ ने शंकाओं-आशंकाओं का भी जवाब दिया है, जो हमारे सामर्थ्य को लेकर कुछ लोगों के मन में रहती हैं। महाकुंभ से अनेक अमृत निकले हैं। एकता का अमृत इसका पवित्र प्रसाद है। महाकुंभ ऐसा आयोजन रहा, जिसमें देश के हर क्षेत्र से हर कोने से आए लोग एक हो गए। अहम त्याग कर वयं के भाव से मैं नहीं, हम की भावना से प्रयाग राज में जुटे, त्रिवेणी का हिस्सा बने।
मॉडर्न युवा पीढ़ी पर क्या बोले पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा- मॉडर्न युवा पीढ़ी महाकुंभ और दूसरे उत्सवों से जुड़ी रहे। आज भारत का युवा परंपरा, आस्था, श्रद्धा को गर्व के साथ अपना रहा है। जब एक समाज की भावनाओं में अपनी विरासत पर गर्व का भाव बढ़ता है तो हम ऐसी ही भव्य प्रेरक तस्वीरें देखते हैं, जो हमने महाकुंभ के दौरान देखी हैं। इससे आपसी भाईचारा और आत्मविश्वास बढ़ता है कि देश के रूप में बड़े लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। ये भावना आज के भारत की बहुत बड़ी पूंजी है।














