उमाकांत त्रिपाठी। बजट सत्र के दूसरे फेज के पांचवें दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ को लेकर संसद को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में अनेक अमृत निकले हैं। एकता का अमृत इसका पवित्र प्रसाद है। इस दौरान उन्होंने कहा कि- हमारे देश में कई छोटी-बड़ी नदिया हैं, कुछ ऐसी हैं जिन पर संकट आ रहा है। कुंभ से हमें दिखा कि नदी उत्सव को विस्तार देना होगा। पीढ़ी को पानी का महत्व पता चलेगा, साफ-सफाई को बल मिलेगा, नदियों की रक्षा होगी। भरोसा है कि महाकुंभ से निकला अमृत हमारे संकल्पों की सिद्धि का बहुत बड़ा माध्यम बनेगा।
सवाल उठाने वालों को पीएम का जवाब
PM ने कहा कि महाकुंभ पर सवाल उठाने वालों को जवाब मिला है। देश के कोने-कोने में आध्यात्मिक चेतना उभरी है। महाकुंभ में राष्ट्रीय चेतना के दर्शन हुए और महाकुंभ के उत्साह-उमंग को महसूस किया। देश की सामूहिक चेतना का नतीजा महाकुंभ के दौरान देखने को मिला। युवा पीढ़ी भी पूरे भाव से महाकुंभ से जुड़ी।
PM मोदी ने मॉरीशस यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के गंगा तालाब में त्रिवेणी का पवित्र जल डाला। अनेकता में एकता हमारी बहुत बड़ी ताकत है। इसी विशेषता को हम निरंतर समृद्ध करते रहें, ये हमारा दायित्व है।
महाकुंभ में नहीं था छोटे-बड़े का भेद
जब अलग क्षेत्र, अलग भाषा के लोग संगम पर उद्घोष करते हैं तो एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना दिखती है। वहां छोटे-बड़े का भेद नहीं था। ये दिखाता है कि एकता का अद्भुत तत्व हमारे भीतर रचा-बसा है। एकता की यही भावना भारतीयों का सौभाग्य है। विश्व में जो बिखराव की स्थिति है, उस दौर में एकजुटता का विराट प्रदर्शन हमारी ताकत है। ये हमारी विशेषता है, कहते आए हैं, महसूस किया है, इसी के विराट रूप का अनुभव प्रयागराज महाकुंभ में किया है। हमारा दायित्व है कि हम इस भावना को समृद्ध करते रहें।














