उमाकांत त्रिपाठी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त एसीओ समिट में हिस्सा ले रहे हैं. उन्होंने अपने संबोधन में अच्छा-खासा वक्त आतंकवाद के मसले को दिया और कहा कि ये किसी एक के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए खतरा है. उन्होंने इस मंच पर एक बार फिर पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाई. हालांकि यहां उनका इशारा चीन की ओर भी था, जो इस हमले पर सीधा स्टैंड नहीं लेता है.
करीब दो महीने पहले जून में SCO Summit से पहले जब रक्षा मंत्रियों की बैठक हुई थी, तब भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसलिए ज्वाइंट स्टेटमेंट देने से इनकार कर दिया था क्योंकि पहलगाम को लेकिन चीन का रुख साफ नहीं था. हालांकि विदेश मंत्रियों की बैठक में चीन का रुख थोड़ा सा बदला हुआ था. आखिरकार जब पीएम मोदी इस शिखर सम्मेलन में पहुंचे, तो उन्होंने चीन और पाकिस्तान के सामने एक बार फिर से वही मुद्दा उठाया, वो भी डंके की चोट पर.
हमने पहलगाम में देखा घिनौना आतंकवाद…
पीएम मोदी ने SCO के मंच पर सिर्फ सहयोग की बात नहीं की, उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे को भी पुरजोर तरीके से उठाया. वे जिस टेबल पर बैठे थे, वहां आतंकवाद को पोसने वाले पाकिस्तान के पीएम भी मौजूद थे और चीन के राष्ट्रपति भी थे, जो पाकिस्तान के इस कृत्य पर अक्सर चुप ही रहता है. प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए खतरा बताया है, जिसने न जाने कितनों के घर उजाड़े हैं और न जाने कितनी माताओं की गोद सूनी कर दी है. पीएम ने पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए कहा कि हमने वहां पर आतंकवाद का सबसे घिनौना रूप देखा है. पाकिस्तान को सुनाते हुए पीएम ने कहा कि आतंकवाद को आर्थिक सहयोग देना भी गलत है.
पीएम ने चीन को भी नहीं छोड़ा …
पीएम मोदी यहीं पर नहीं रुके, उन्होंने चीन को सुनाते हुए कहा कि आतंकवाद सिर्फ हमारी नहीं सबकी लड़ाई है. इस पर डबल स्टैंडर्ड नहीं होना चाहिए. यहां पीएम का इशारा चीन की तरफ था, जिसने पहलगाम हमले को लेकर कभी भी खुलकर कुछ नहीं बोला. चीन ने पहलगाम हमले को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद मानने से इनकार कर दिया था. यहां तक कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर पर भी चीन पाकिस्तान के हक में खड़ा रहा.














