उमाकांत त्रिपाठी।Justice Yashwant Varma: जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से नकदी बरामदगी का मामला कई दिनों से चर्चा में है. अब शायद पहली बार इस केस पर केंद्र सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आई है. गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के बिना एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि जब एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती तो जब्ती कैसे हो सकती है? उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीशों की एक कमेटी इस मामले की जांच कर रही है और हमें उसकी रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए.
पूरे मामले पर यह पहली प्रतिक्रिया
दरअसल एक निजी चैनल के साथ इंटरव्यू में अमित शाह ने यह बातें कही हैं. केंद्र सरकार की तरफ से इस पूरे मामले पर यह पहली प्रतिक्रिया आई है. जब उनसे इस मामले में सवाल किया गया तो अमित शाह ने जिक्र किया कि सीजेआई संजीव खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इस मामले को संज्ञान में लेकर जांच के लिए एक कमेटी बनाई है.
कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी
उन्होंने कहा कि- दिल्ली पुलिस और फायर ब्रिगेड से जो भी दस्तावेज मांगे जा रहे हैं वे कमेटी को उपलब्ध करवा रहे हैं और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं. अमित शाह ने यह भी कहा कि कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी और हमें उसके फैसले का इंतजार करना चाहिए.
स्थानांतरित करने की अधिसूचना जारी
आपकों बता दें कि- इससे पहले सरकार ने शुक्रवार को यशवंत वर्मा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने की अधिसूचना जारी कर दी. कानून मंत्रालय ने यह अधिसूचना जारी की है. सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने सोमवार को सिफारिश करते हुए कहा था कि यह कदम 14 मार्च को होली की रात आग लगने की घटना के बाद उनके आवास से कथित तौर पर नकदी मिलने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिये गये आंतरिक जांच के आदेश से अलग है.














