उमाकांत त्रिपाठी।लेह में 3 फरवरी से लोग लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। 24 फरवरी को केंद्र सरकार के साथ प्रदर्शनकारियों की चौथी बार बैठक हुई। इसमें सरकार ने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने से इनकार कर दिया। इसके बाद लोगों ने प्रदर्शन तेज कर दिए हैं।
गृह मंत्रालय की हुई बैठक
4 मार्च को लद्दाख के दो प्रमुख संगठन लेह एपेक्स बॉडी यानी ABL और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस यानी KDA के साथ गृह मंत्रालय की बैठक हुई। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में गृहमंत्री अमित शाह ने आर्टिकल-371 जैसे कानून लद्दाख में लागू करने की बात कही है। जिससे यहां के लोगों की जमीन, नौकरी और संस्कृति की रक्षा की जा सके।
आर्टिकल 371 लद्दाख में होगा लागू
भारत के संविधान में कुल 22 भाग हैं। इसके 21वें भाग में आर्टिकल 371 है। इसी आर्टिकल 371 से जुड़े प्रावधानों के जरिए महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड, गोवा, मणिपुर और कर्नाटक को ‘स्पेशल स्टेटस’ का दर्जा मिला है। इससे इन 12 राज्यों को बाकी राज्यों से कुछ अलग और खास अधिकार मिल जाते हैं। इन राज्यों में रहने वाले धार्मिक और सामाजिक समूहों की प्रथाओं और बाकी मामलों में राज्य या केंद्र सरकार हस्तक्षेप नहीं करती है। ये समूह अपने मामलों में कोई भी अहम फैसले ले सकते हैं।शुरुआत में ये कानून सिर्फ महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में लागू हुआ था, लेकिन नए राज्यों के बनने के साथ आर्टिकल 371-A से 371-J तक नए प्रावधान जोड़े गए।उदाहरण के लिए आर्टिकल 371-A के तहत संसद नगालैंड की सामाजिक-धार्मिक प्रथाओं और राज्य की विधानसभा की सहमति के बिना जमीन और स्वामित्व से जुड़े कानून नहीं बना सकती है।
केंद्र शासित प्रदेश में लागू होगा आर्टिकल-371
इसी तरह आर्टिकल 371-G में मिजोरम के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। आर्टिकल 371-B और 371-C असम और मणिपुर की विधानसभाओं में विशेष समितियों के बनाने की इजाजत देती हैं। इन समितियों में आदिवासी क्षेत्रों और पहाड़ी क्षेत्रों से चुने गए विधायक शामिल होते हैं।नगालैंड, मणिपुर, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा के राज्य बनने के तुरंत बाद नए प्रावधान लागू किए गए। अगर सरकार लद्दाख में ये कानून लागू करती है तो ऐसा पहली बार होगा, जब किसी केंद्र शासित प्रदेश में आर्टिकल-371 लागू होगा।
4 साल पहले हटाया गया था 370
सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता के मुताबिक आर्टिकल 370 के तहत भारतीय संघ में जम्मू-कश्मीर को शामिल किया गया था। 2019 में संसद ने उन प्रावधानों को खत्म कर दिया। दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 370 को निरस्त करने पर मुहर लगाते हुए कहा था कि यह प्रावधान संविधान के अस्थायी और संक्रमणकालीन अध्याय-21 का हिस्सा था। उसी तरह से आर्टिकल 371 भी संविधान के 21वें अध्याय का हिस्सा है, जिसमें अस्थायी प्रावधान किए गए हैं।अनुच्छेद-371 के तहत लद्दाख के लिए विशेष व्यवस्था बनाने के लिए संविधान में संशोधन करना पड़ सकता है, लेकिन उसके बाद दूसरे राज्यों से भी ऐसी मांगों के लिए दबाव बढ़ने से संघीय व्यवस्था में नई मुश्किलें बढ़ सकती हैं।














