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खत्म नहीं हुई इंडिया गठबंधन की उम्मीदें: कांग्रेस ने अपनाई वेट एंड वाच की पॉलिसी, सरकार बनाने के लिए करेंगे इंतजार

उमाकांत त्रिपाठी।लोकसभा चुनाव-2024 में इंडिया गठबंधन ने 234 सीटों पर जीत दर्ज की है. ये आंकड़े बता रहे हैं कि जिस मकसद के लिए 25 से ज्यादा विपक्षी पार्टियां एक मंच पर आईं, उसमें काफी हद उन्हें सफलता मिली है. इंडिया गठबंधन की इसी कामयाबी ने बीजेपी को बहुमत से दूर कर दिया. जेपी नड्डा के नेतृत्व वाली इस पार्टी को अब सरकार चलाने के लिए नीतीश कुमार और टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू पर निर्भर रहना पड़ेगा. अब पूरे 5 साल बीजेपी के इन सहयोगियों पर हर किसी की नजर रहेगी. वैसे चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद से ही इंडिया गठबंधन इन दोनों दिग्गजों पर नजर रखना शुरू कर दिया है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बोले
ये भी बताया गया कि इंडिया गठबंधन के कई नेताओं ने उनसे संपर्क भी किया. ऐसा लगने भी लगा था कि इंडिया गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश करेगा, लेकिन बुधवार शाम को उसकी बैठक में इन कयासों पर विराम लग गया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, बीजेपी के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी. जनाकांक्षा को साकार करने के लिए हम सही समय पर उचित कदम उठाएंगे.

वेट एंड वाच की पॉलिसी अपना रही कांग्रेस
सवाल उठता है कि इंडिया गठबंधन के समर्थकों को केंद्र में अपनी सरकार देखने के लिए कितना इंतजार करना पड़ेगा. तो इसका जवाब खरगे के बयानों में ही छिपा है. दरअसल, कांग्रेस वेट एंड वाच की पॉलिसी अपना रही है. वो सरकार बनाने की जल्दबाजी नहीं करना चाहती है. जब तक उसके पास बहुमत के आंकड़े नहीं आ जाते वो सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करेगी. वो नीतीश और नायडू के कदम पर नजर रख रही है, जो वाजिब भी लगता है.नीतीश और नायडू पहले कांग्रेस के साथ साथ रह चुके हैं. नीतीश कुमार तो इंडिया गठबंधन के अहम सदस्य रहे हैं. वो गठबंधन की बैठकों में हाजिर रहते थे. नीतीश के नेचर को देखते हुए ही इंडिया गठबंधन का जोश बना हुआ है. उधर, नायडू भी कब पाला बदल लें, ये किसी को नहीं पता. वो 2019 तक बीजेपी के साथ थे, लेकिन विशेष राज्य के दर्ज के मुद्दे पर अलग हो गए और कांग्रेस के साथी बन गए थे. लेकिन 2024 चुनाव से पहले नायडू का मूड फिर बदला और वो बीजेपी के साथ आ गए.

 

 

कब तक बीजेपी के साथ रहेंगे नीतीश-नायडू?
अब देखना होगा कि नीतीश और नायडू कब तक बीजेपी के साथ रहते हैं. दोनों का पाला बदलने का इतिहास रहा है. उनके इतिहास को देखते हुए इंडिया गठबंधन की सरकार बनाने की उम्मीदें पूरे 5 साल जिंदा रहेंगी. हालांकि नीतीश कई बार कह चुके हैं वो अब कहीं नहीं जा रहे हैं. नायडू भी बोल चुके हैं वो एनडीए के साथ ही रहेंगे. लेकिन राजनीति में बयान का क्या. कब कौन करवट बदल ले, कोई नहीं जानता.अभी नई सरकार का गठन नहीं हुआ, लेकिन नीतीश और नायडू के हर कदम पर सभी बारिकी से नजर बनाए हैं. नीतीश जब बुधवार को पटना से दिल्ली आ रहे थे तो उनके साथ तेजस्वी भी थे. दोनों एक ही विमान से दिल्ली पहुंचे. बिहार के दोनों नेता अगल-बगल बैठे थे. तस्वीर सामने आने के बाद पूछा जाने लगा कि दोनों में क्या खिचड़ी पक रही है. यही नहीं नायडू की डीएमके के नेता एमके स्टालिन से मुलाकात हुई. दोनों नेताओं की मुलाकात दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई.

 

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