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Mann Ki Baat: बच्चों को सीख, महुआ के फूल का जिक्र, मन की बात में क्या क्या बोले पीएम मोदी, जानिए बड़ी बातें

उमाकांत त्रिपाठी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 120वें एपिसोड में त्योहारों, युवाओं के लिए नई जानकारियों, योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में हो रहे वैश्विक कार्यों पर चर्चा की।

आइए-20 पॉइंट्स में पीएम मोदी की महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं

पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ की शुरुआत देशवासियों को चैत्र नवरात्रि और भारतीय नववर्ष की बधाई के साथ की। उन्होंने इसे भारत की विविधता का अद्भुत स्वरूप बताया। उन्होंने कहा कि- यह विक्रम संवत 2082 का आरंभ है।

उन्होंने बताया कि- आज से ही कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ‘उगादि’ का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसी तरह, महाराष्ट्र में ‘गुड़ी पड़वा’ का उत्सव हो रहा है। अगले कुछ दिनों में असम में ‘रोंगाली बिहू’, बंगाल में ‘पोइला बोइशाख’ और कश्मीर में ‘नवरेह’ का पर्व मनाया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि- 13 से 15 अप्रैल के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में त्योहारों की जबरदस्त धूम रहेगी। इसी दौरान ईद भी मनाई जाएगी, जिससे पूरे देश में उत्साह का माहौल है।

उन्होंने गर्मियों की चर्चा करते हुए कहा कि- यह समय बच्चों के लिए नया शौक अपनाने और अपने हुनर को निखारने का सबसे अच्छा अवसर है। आज बच्चों के लिए ऐसे कई प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं, जहां वे बहुत कुछ नया सीख सकते हैं।

युवाओं के लिए उन्होंने ‘MY-Bharat’ प्लेटफॉर्म के एक खास कैलेंडर का जिक्र किया, जिसे विशेष रूप से गर्मी की छुट्टियों के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस कैलेंडर में कई अनूठे प्रयासों को शामिल किया गया है।

पीएम मोदी ने बताया कि- ‘MY-Bharat’ के स्टडी टूर के तहत युवा यह जान सकते हैं कि हमारे ‘जन औषधि केंद्र’ कैसे काम करते हैं। वे ‘Vibrant Village’ अभियान के तहत सीमावर्ती गांवों में जाकर वहां की संस्कृति और खेलों से जुड़ सकते हैं। इसके अलावा, अंबेडकर जयंती पर पदयात्रा में भाग लेकर वे संविधान के मूल्यों के प्रति जागरूकता फैला सकते हैं।

उन्होंने भारतीय पारंपरिक खेलों की बढ़ती लोकप्रियता पर चर्चा की और कहा कि- ये अब मुख्यधारा की संस्कृति का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने मशहूर रैपर Hanumankind के नए गाने ‘Run It Up’ का जिक्र किया, जिसमें कलारिपयट्टू, गतका और थांग-ता जैसी पारंपरिक मार्शल आर्ट्स को दिखाया गया है।

पीएम मोदी ने अपने हालिया मॉरीशस दौरे पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि- वाराणसी के अथर्व कपूर, मुंबई के आर्यश लीखा और अत्रेय मान ने इस यात्रा पर अपनी भावनाएं साझा कीं। इन युवाओं ने लिखा कि मॉरीशस में ‘गीत-गवाई’ प्रस्तुति ने उन्हें बहुत आनंदित किया। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार से आए कई पत्रों में भी ऐसी ही भावनाएं देखने को मिलीं।

प्रधानमंत्री ने गिरमिटिया मजदूरों के इतिहास पर बात करते हुए बताया कि- करीब 200 साल पहले भारत से कई लोग मजदूर के रूप में मॉरीशस गए थे। हालांकि, समय के साथ वे वहां रच-बस गए और अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपनी विरासत को सहेजकर रखा और अपनी जड़ों से जुड़े रहे। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले साल जब वे गुयाना गए थे, तब वहां की चौताल प्रस्तुति ने उन्हें बहुत प्रभावित किया था।

उन्होंने उन अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भी चर्चा की, जो भारतीय संस्कृति के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनमें से एक है सिंगापुर इंडियन फाइन आर्ट्स सोसायटी, जिसने भारतीय नृत्य, संगीत और संस्कृति के संरक्षण के 75 गौरवशाली वर्ष पूरे किए हैं। इस कार्यक्रम में सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।

प्रधानमंत्री ने योग और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता पर बात की। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा योग और आयुर्वेद को वेलनेस का बेहतरीन माध्यम मानकर अपना रहे हैं। पीएम मोदी ने अपनी ब्राजील यात्रा के दौरान चिली के राष्ट्रपति से हुई चर्चा का जिक्र करते हुए बताया कि वहां भी आयुर्वेद की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।

उन्होंने ‘Somos India’ नामक एक टीम के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्पेनिश में इसका अर्थ है “We Are India”। यह टीम पिछले एक दशक से योग और आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में जुटी है। वे न केवल इलाज, बल्कि शैक्षिक कार्यक्रमों के जरिए भी इन विधाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके अलावा, वे आयुर्वेद और योग से संबंधित सामग्री का स्पेनिश भाषा में अनुवाद करवा रहे हैं।

पीएम मोदी ने महुआ के फूलों के बढ़ते उपयोग पर बात की। उन्होंने बताया कि हमारे गांवों और विशेष रूप से आदिवासी समुदाय में महुआ के फूलों का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि अब देश के कई हिस्सों में महुआ के फूलों को नए तरीकों से उपयोग में लाया जा रहा है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में महुआ के फूलों से कुकीज बनाई जा रही हैं, जो एक अनूठी पहल है।

राजाखोह गांव की चार बहनों के प्रयास से यह कुकीज़ काफी लोकप्रिय हो रही है। इन महिलाओं के जज़्बे को देखकर एक बड़ी कंपनी ने उन्हें फैक्ट्री में काम करने की ट्रेनिंग दी। इनसे प्रेरित होकर गांव की कई अन्य महिलाएं भी इस पहल से जुड़ गईं। अब इनके बनाए महुआ कुकीज़ की मांग तेजी से बढ़ रही है।

पीएम मोदी ने बताया कि तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में दो बहनों ने महुआ के फूलों से नया प्रयोग किया है। वे इनसे तरह-तरह के पकवान बनाती हैं, जिन्हें लोग बहुत पसंद कर रहे हैं। उनके पकवानों में आदिवासी संस्कृति की मिठास और परंपराओं की सुगंध समाई हुई है।

उन्होंने एक खास फूल ‘कृष्ण कमल’ के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह एक शानदार और अद्भुत पुष्प है। गुजरात के एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास इसकी बड़ी संख्या में उपस्थिति इसे पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना रही है। कृष्ण कमल एकता नगर के आरोग्य वन, एकता नर्सरी, विश्व वन और मियावाकी फॉरेस्ट में अपनी खूबसूरती बिखेर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है, जहां सबसे अधिक टेक्सटाइल वेस्ट निकलता है। यह एक बड़ी चुनौती है, लेकिन खुशी की बात यह है कि इससे निपटने के लिए देश में कई सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कई भारतीय स्टार्टअप टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटीज पर काम कर रहे हैं। कई टीमें कचरा बीनने वाले हमारे भाई-बहनों के सशक्तिकरण के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि कई युवा साथी सस्टेनेबल फैशन को बढ़ावा देने में जुटे हैं। वे पुराने कपड़ों और जूतों-चप्पलों को रीसायकल कर जरूरतमंदों तक पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा, टेक्सटाइल वेस्ट से सजावट की वस्तुएं, हैंडबैग, स्टेशनरी और खिलौने जैसी कई उपयोगी चीजें बनाई जा रही हैं। कई संस्थाएं आजकल सर्कुलर फैशन ब्रांड को लोकप्रिय बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि- टेक्सटाइल वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में कुछ शहर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। हरियाणा का पानीपत टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग का ग्लोबल हब बनता जा रहा है। बेंगलुरु अपनी नवाचारी तकनीकों से इस क्षेत्र में अगुवा बना हुआ है, जहां आधे से ज्यादा टेक्सटाइल वेस्ट को व्यवस्थित रूप से एकत्रित किया जाता है। यह अन्य शहरों के लिए एक मिसाल है। इसी तरह, तमिलनाडु का तिरुपुर वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट और रिन्यूएबल एनर्जी के जरिए टेक्सटाइल वेस्ट मैनेजमेंट में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।

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