उमाकांत त्रिपाठी।कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए रामनिवास रावत को वन मंत्री बनाए जाने के बाद भाजपा में ही बगावत हो गई है। नागर सिंह चौहान से वन एवं पर्यावरण विभाग छीनकर रामनिवास को देने पर नागर सिंह ने सोमवार सुबह मंत्री पद से इस्तीफा देने की बात कही। वे बोले- सांसद पत्नी अनीता नागर सिंह से भी इस्तीफा दिलवाऊंगा। नागर का कहना है कि वे मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्ढा से मुलाकात कर अपनी बात रखेंगे।
नागर सिंह बोले
सोमवार को नागर सिंह ने मीडिया से कहा कि मुझसे कोई विभाग छीनना था तो सीएम बता सकते थे। लेकिन कांग्रेस से आए हुए नेता को मेरा विभाग दे देना गलत है। यह फैसला अचानक हुआ, इस कारण मैं दुखी हूं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बात करूंगा। मैं बीते 25 सालों से पार्टी के लिए काम कर रहा हूं। ऐसा अपमान बर्दाश्त नहीं करूंगा। बता दें कि नागर सिंह के पास अब अनुसूचित जाति कल्याण विभाग ही बचा है।
नागर सिंह चौहान के बयान पर अध्यक्ष मुकेश नायक बोले
नागर सिंह चौहान के बयान पर कांग्रेस की ओर से पीसीसी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा कि नागर के मंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश भाजपा में नैसर्गिक नेतृत्व को दरकिनार कर दलबदलुओं को तवज्जो देने का जीवंत उदाहरण है। भाजपा को अपने मेहनती कार्यकर्ताओं से ज्यादा प्यारे दलबदलू हैं।
सीएम ने 7 दिन पहले ही नागर को मंत्री पद से इस्तीफा देने को कहा था
नागरसिंह से वन विभाग लेकर रामनिवास को देने की पटकथा एक हफ्ते पहले ही लिखी जा चुकी थी। सूत्रों के अनुसार, भोपाल में कैबिनेट बैठक के बाद सीएम ने बंद कमरे में बुलाकर नागरसिंह से कहा था- ‘अब आपकी पत्नी रतलाम से सांसद बन गई हैं। आपको मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा, क्योंकि ऊपर (केंद्र) से काफी दबाव है।’
इस पर चौहान ने कहा था कि मैं दिल्ली बात कर लूंगा, क्योंकि पत्नी के सांसद बनने पर मेरा करियर क्यों खराब किया जा रहा है? मैं तो पत्नी के लिए टिकट मांगने नहीं गया था। मैंने कहा भी था कि झाबुआ जिलाध्यक्ष भानू भूरिया, पूर्व विधायक कलसिंह भाबर व दिलीपसिंह परमार में से किसी को भी टिकट दे दो। नागर इसके बाद प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा व संगठन मंत्री हितानंद शर्मा से भी मिले, लेकिन दोनों ने अनभिज्ञता जाहिर की।
नागरसिंह 3 माह लोकसभा चुनाव में जुटे
नागरसिंह को वन व पर्यावरण विभाग मिलने के बाद पार्टी ने लोकसभा चुनाव का टिकट दे दिया। चौहान तीन महीने प्रचार में जुटे रहे। फिर संगठन ने उन्हें अमरवाड़ा उपचुनाव में लगा दिया। सूत्रों के अनुसार, मांगने पर भी उन्हें ओएसडी नहीं दिया गया।













