उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दुबई गए हुए हैं। आज COP-28 कार्यक्रम में दुनियाभर के बड़े नेताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में साल 2028 में COP33 शिखर सम्मेलन की मेजबानी का प्रस्ताव रखा। इसस दौरान पीएम ने कई अहम बातों का जिक्र किया. पीएम ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि संयुक्त अरब अमीरात द्वारा आयोजित COP28 सम्मेलन प्रभावी जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में नई गति लाएगा।

HoS/HoG के लिए COP28 उच्च-स्तरीय खंड के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सबसे पहले, मैं मेरे द्वारा उठाए गए जलवायु न्याय, जलवायु वित्त और ग्रीन क्रेडिट जैसे मुद्दों पर आपके निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त करना चाहता हूं। COP-28 शिखर सम्मेलन पर, संयुक्त अरब अमीरात में श्रीलंका के राजदूत उदय इंद्ररत्न ने कहा कि …यूएई एक बहुत बड़े और महत्वपूर्ण COP-28 कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है। यह बेहद सफल होने जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्बन उत्सर्जन घटाने और भारत की मेजबानी में आयोजन का प्रस्ताव भी रखा। बता दें कि सीओपी28 का आयोजन संयुक्त अरब अमीरात की अध्यक्षता में 30 नवंबर से 12 दिसंबर तक हो रहा है। सीओपी-28 के दौरान भारत और सर्बिया संबंधों पर सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने कहा, “हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। मैंने भारत का दौरा किया और गुजरात गया। मैंने कई साल पहले पीएम मोदी से बात की थी।

शुक्रवार को शिखर सम्मेलन शुरू होने पर नेताओं ने पारंपरिक ‘फैमिली फोटो’ के लिए पोज दिया। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को इटली के प्रधान मंत्री जियोर्जिया मेलोनी और यूरोपीय संघ के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन सहित विभिन्न विश्व नेताओं के साथ बातचीत करते देखा गया। इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय भी मौजूद थे और उन्होंने अन्य वैश्विक नेताओं के साथ फैमिली फोटो खिंचवाई।

COP28 उच्च-स्तरीय खंड के उद्घाटन पर PM मोदी ने कहा, “मैं आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं कि मेरे द्वारा उठाए गए क्लाइमेट जस्टिस, क्लाइमेट फाइनेंस और ग्रीन क्रेडिट जैसे विषयों को आपने निरंतर समर्थन दिया है। हम सभी के प्रयासों से यह विश्वास बढ़ा है कि विश्व कल्याण के लिए सबके हितों की रक्षा आवश्यक है, सबकी भागीदारी आवश्यक है। आज भारत ने दुनिया के सामने इकोलॉजी और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। भारत में दुनिया की 17% आबादी रहती है, इसके बावजूद वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में इसका योगदान 4% से कम है।

इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि- भारत ने अपनी जी 20 अध्यक्षता में वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर की भावना के साथ क्लाइमेट के विषय को निरंतर महत्व दिया है। सस्टेनेबल भविष्य के लिए हमने मिलकर ग्रीन डेवेलपमेंट पैक्ट पर सहमति बनाई। हमने सतत विकास के लिए जीवनशैली के सिद्धांत बनाए, हमने वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा को 3% करने पर प्रतिबद्धता जताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्रमुख क्षेत्र में यूएई के साथ देश की साझेदारी भविष्य की दृष्टि से प्रेरित होकर मजबूत होती जा रही है।














