उमाकांत त्रिपाठी। PM Modi Mann Ki Baat. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्योहारों के मौसम में लोगों से स्थानीय कारीगरों और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की है। रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को प्रसारित ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगरों के बनाए उत्पाद खरीदने से उनका उत्साह बढ़ेगा और देश के पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
Very inspiring efforts from across India highlighted in today’s #MannKiBaat. Join in… https://t.co/1QIa12bGCo
— Narendra Modi (@narendramodi) October 25, 2026
PM Modi Mann Ki Baat में प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत के स्थानीय उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं। बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव तक जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय किसानों के लिए दुनिया के अलग-अलग बाजारों में नए अवसर खुल रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने खादी की बढ़ती बिक्री, अंगदान, स्वास्थ्य सेवाओं, पारंपरिक खेती और स्थानीय स्तर पर हो रहे नवाचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करके आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा सकता है।
त्योहारों पर स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि त्योहारों के दौरान लोग अपने परिवार और प्रियजनों के लिए कई तरह की खरीदारी करते हैं। ऐसे समय में स्थानीय कारीगरों के बनाए उत्पादों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि खरीदारी करते समय स्थानीय उत्पादों को महत्व दें और उन्हें प्रमुखता से अपनाएं। इससे उन लोगों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिनकी मेहनत और हुनर से हस्तशिल्प, खादी और दूसरे पारंपरिक उत्पाद तैयार होते हैं।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूती मिलेगी। इससे देश में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने के साथ भारतीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।
उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता के साथ-साथ आकर्षक पैकेजिंग के महत्व पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि अच्छी पैकेजिंग किसी उत्पाद को बाजार में पहचान दिलाने और ग्राहकों का ध्यान आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पूर्णिया का मखाना ग्रीस और कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव पहुंची
‘मन की बात’ के दौरान प्रधानमंत्री ने भारतीय कृषि उत्पादों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुंच के उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस पहुंच रहा है। वहीं, कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव के बाजार में पहुंच रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों के लिए विदेशों में बाजार खुलने से किसानों को नए अवसर मिलते हैं। इससे देश में पैदा होने वाले कृषि उत्पादों की पहचान दूसरे देशों तक पहुंच सकती है।
उन्होंने महाराष्ट्र की ‘शबरी नेचुरल्स’ पहल का भी उल्लेख किया। इस पहल के तहत आदिवासी समुदायों के शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पादों को बाजार में लाया जा रहा है। इन उत्पादों की पैकेजिंग में आदिवासी कला की झलक दिखाई देती है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ मिला है। उन्होंने कर्नाटक के एक स्टार्टअप का भी जिक्र किया, जो बांस और कृषि अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री तैयार कर रहा है।
इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने बताया कि स्थानीय उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच के माध्यम से नई पहचान दिलाई जा सकती है।
गांधी जयंती पर खादी उत्पादों की बिक्री ₹28 करोड़ से अधिक
प्रधानमंत्री मोदी ने खादी की बिक्री के आंकड़े साझा करते हुए कहा कि इस साल गांधी जयंती पर एक ही दिन में खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों की बिक्री ₹28 करोड़ से अधिक रही।
उन्होंने बताया कि यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में करीब ₹1.5 करोड़ ज्यादा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, खादी की लोकप्रियता बढ़ने से उन लोगों को भी लाभ मिलता है, जो अपने हुनर और मेहनत से खादी तथा हस्तशिल्प के उत्पाद तैयार करते हैं।
खादी को बढ़ावा देने का उद्देश्य केवल पारंपरिक कपड़ों की बिक्री तक सीमित नहीं है। इससे कारीगरों, बुनकरों और छोटे उत्पादकों की आजीविका को सहारा मिल सकता है।
प्रधानमंत्री ने त्योहारों के दौरान खादी और स्थानीय हस्तशिल्प को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि लोगों की खरीदारी से पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भाई परमानंद की 150वीं जयंती का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता सेनानी भाई परमानंद का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 4 नवंबर को उनकी 150वीं जयंती है।
भाई परमानंद आर्य समाज और गदर पार्टी से जुड़े रहे थे। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका और संघर्ष का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने देश की आजादी के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना किया और काला पानी की सजा भी काटी।
प्रधानमंत्री ने उनके जीवन और योगदान को याद करते हुए नई पीढ़ी से स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में पढ़ने और उनके संघर्ष से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
अंगदान का उदाहरण देकर लोगों को किया प्रेरित
प्रधानमंत्री मोदी ने अंगदान की अहमियत पर भी बात की। उन्होंने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी का उदाहरण दिया, जिनकी सड़क दुर्घटना के बाद उनके परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन के बाद अंगदान करने का फैसला दूसरे लोगों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे निर्णय समाज में संवेदनशीलता और मानवता का संदेश भी देते हैं।
अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने इस तरह के प्रयासों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर और स्वास्थ्य सेवाओं का जिक्र
प्रधानमंत्री ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए बताया कि देशभर में लगभग 1 लाख 90 हजार आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं।
उन्होंने कहा कि पहले कई लोगों को डॉक्टर से परामर्श लेने और जांच कराने के लिए काफी समय लगाना पड़ता था। स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के करीब पहुंचाने से उन्हें अपने आसपास ही प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
प्रधानमंत्री ने तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने ई-संजीवनी के माध्यम से टेली-परामर्श की सुविधा को तकनीक के उपयोग का उदाहरण बताया।
पंजाब में पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने की पहल
प्रधानमंत्री ने पंजाब के ‘खेती विरासत मिशन’ और उसकी ‘नव-त्रिंजन’ पहल का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस पहल के जरिए पंजाब के मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक कपास की खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।
ऐसी पहलों का उद्देश्य खेती में पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाना और किसानों को वैकल्पिक तरीकों से जोड़ना है। प्रधानमंत्री ने स्थानीय समुदायों और संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर होने वाले प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
12 साल की यात्रा को तीर्थयात्रा जैसा बताया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ की शुरुआत 12 साल पहले विजयादशमी के अवसर पर हुई थी। उन्होंने इस कार्यक्रम की यात्रा को देशवासियों को करीब से जानने और उनके प्रयासों को समझने की तीर्थयात्रा जैसा बताया।
उन्होंने कहा कि इस मंच के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले ऐसे लोगों और समुदायों के प्रयास सामने आते हैं, जिनका योगदान अक्सर व्यापक स्तर पर चर्चा में नहीं आ पाता।
139वें एपिसोड में स्थानीय उत्पादों, किसानों, कारीगरों, स्वास्थ्य सेवाओं, अंगदान और पारंपरिक खेती से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से प्रधानमंत्री ने नागरिकों की भागीदारी और स्थानीय पहलों के महत्व को रेखांकित किया।
त्योहारों के दौरान स्थानीय उत्पाद खरीदने की उनकी अपील का मुख्य संदेश यही रहा कि लोगों की रोजमर्रा की खरीदारी भी देश के कारीगरों, छोटे उत्पादकों और किसानों को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकती है।














