उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नीदरलैंड दौरे के दौरान डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ विश्व प्रसिद्ध अफ्सलाउटडाइक डैम का दौरा किया। इस दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, क्लाइमेट चेंज और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा उनकी चार देशों की यूरोप यात्रा का हिस्सा है। इस दौरे में वे स्वीडन, नॉर्वे और इटली भी जाएंगे।
अफ्सलाउटडाइक डैम का दौरा करने के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वाटर मैनेजमेंट के क्षेत्र में नीदरलैंड ने पूरी दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि- दुनिया को नीदरलैंड की तकनीक और अनुभव से सीखने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि- भारत आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी, बाढ़ से सुरक्षा मिलेगी और इनलैंड वाटर नेटवर्क को विस्तार देने में मदद मिलेगी।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अफ्सलाउटडाइक डैम केवल एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि इनोवेशन और विजन का प्रतीक है। यह डैम समुद्री जल को नियंत्रित करने, बाढ़ से सुरक्षा देने और मीठे पानी के भंडारण में अहम भूमिका निभाता है।
दौरे के दौरान गुजरात के महत्वाकांक्षी कल्पसर प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हुई। इस परियोजना के तहत खंभात की खाड़ी के पास विशाल मीठे पानी का जलाशय और बांध विकसित करने की योजना है। इससे सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
भारत और नीदरलैंड के बीच पहले से जल प्रबंधन और समुद्री तकनीक को लेकर सहयोग जारी है। अब दोनों देश क्लाइमेट रेजिलिएंस, फ्लड कंट्रोल और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं पर काम कर सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की दीर्घकालिक जल सुरक्षा और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।













