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एक बार फिर सीएम पुष्कर धामी ने लगाया पीएम मोदी को फोन, तीसरी बार फोन कर दी टनल में फंसे मजदूरों की जानकारी

उमाकांत त्रिपाठी। उत्तरकाशी की टनल में हुए हादसे पर पीएम मोदी भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। लगातार टनल में फंसे मजदूरों के हालात और बचाव कार्य की समीक्षा पीएम मोदी कर रहे हैं। इस बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीएम मोदी को फोन कर बचाव और राहत कार्य की जानकारी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीएम धामी से कहा है कि केंद्र और राज्य की एजेंसियों के सहयोग से मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा। हमें सिर्फ और सिर्फ फंसे हुए मजदूरों का मनोबल बनाए रखने की जरूरत है। वहीं सीएम धामी ने पीएम को बताया कि- सुरंग में फंसे श्रमिक सुरक्षित हैं. उन्हें आक्सीजन, पौष्टिक भोजन और पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। आपको बता दें कि ये तीसरी बार है, जब पीएम मोदी और सीएम धामी के बीच इस हादसे को लेकर बातचीत हुई है।

7 दिन से फंसे हैं 41 मजदूर

बता दें कि ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिल्क्यारा और डंडालगांव के बीच सुरंग का निर्माण किया जा रहा था। जिसका एक हिस्सा करीब 7 दिन पहले सुबह ढह गया था। इन टनल में करीब 41 मजदूर गिर गए थे, सुरंग के दोनों किनारों के बीच 441 मीटर की दूरी का निर्माण होना था। इस सुरंग की कुल लंबाई 4.5 किलोमीटर है, इसमें सिल्क्यारा के छोर से 2,340 मीटर और डंडालगांव की ओर से 1,750 मीटर तक निर्माण किया गया है। इन सभी मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू टीम जुटी हुई है लेकिन भारी मलबा उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक अब मजदूरों को निकालने के लिए नए प्लान पर काम किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक नए प्लान के तहत पहाड़ की चोटी पर एक रास्ता बनाया जाएगा ताकि लगभग 103 मीटर की गहराई तक ड्रिलिंग कर फंसे मजदूरों को निकाला जा सके।

नितिन गडकरी ने किया उत्तरकाशी का दौरा

टनल हादसे के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी उत्तरकाशी का दौरा किया और रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा की। नितिन गडकरी ने इस दौरान कहा कि- हम इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में जरूर कामयाब होंगे। पीएम मोदी ने भी इसे लेकर चिंता जाहिर की है, राज्य सरकार हमारी मदद कर रही है। भारतीय सरकार की कई एजेंसियों के साथ-साथ निजी एजेंसियों भी इस ऑपरेशन में शामिल हैं। हमारी पहली कोशिश सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। हम 6 इंच के पाइप के जरिए ज्यादा खाना पानी ऑक्सीजन भेजने की कोशिश कर रहे हैं। 42 मीटर का काम हो चुका है और जल्द ही उन तक पहुंच जाएगा।

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