उमाकांत त्रिपाठी।पिछले 2 साल से जिस तरीके से नक्सलियों के खिलाफ अभियान सुरक्षाबल चला रहे हैं, उसने नक्सलियों की कमर बुरी तरह से तोड़ दी है. इन ऑपरेशंस में छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बल शामिल हैं. इन अभियानों को सुरक्षाबल और राज्य पुलिस बेहद रणनीतिक तरीके से अंजाम दे रही है. नतीजतन, अप्पाराव उर्फ चलपती उर्फ जयराम जैसा नक्सली कमांडरों का गुरु भी मारा गया है. और ना जाने कितने ही खूंखार नक्सली. इन ऑपरेशंस ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है. यह इस बात का गवाह है कि कैसे नक्सलियों को इस रणनीति से बड़ा नुकसान पहुंच रहा है. आइये जानते हैं…
दरअसल, गृह मंत्री शाह ने लक्ष्य रखा है कि- नक्सली मुक्त भारत 2026 मार्च तक हो और तब से करीब आधा दर्जन बड़े ऑपरेशन सुरक्षा बलों द्वारा नक्सलियों के खिलाफ हो चुके हैं.. इसमें उनके कई बड़े कमांडर मारे गए हैं और महत्वपूर्ण काडर मारे गए हैं.इस तरह 2023 से अभी तक 388 खबर लिखे जाने तक नक्सलियों का सफाया हो चुका है.. गरियाबंद में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का जो एनकाउंटर चल रहा है उससे इसकी तादाद और ज्यादा बढ़ सकती है.
गृह मंत्री शाह के निर्देश पर भारत में नक्सलवाद के खाते का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है. ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा कैंप को नक्सल प्रभावित इलाकों में अंदरूनी इलाकों में स्थापित किया जा रहा है. इसके बाद जहां पर सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित हुए हैं, उसके 10 किलोमीटर इलाके में भारत सरकार से संबंधित विकास की सभी परियोजनाओं को वहां की जनता तक पहुंचाना इसके साथ-साथ इलाके की सुरक्षा करना, अपनी पोस्ट को सुरक्षित रखना यह सुनिश्चित किया जा रहा है.
इसी रणनीति के तहत 2019 से लेकर अब तक 290 सुरक्षा बलों के कैंप की स्थापना हो चुकी है. 2024 में नए स्थापित सुरक्षा बल कैंपों की तादाद 50 से ज्यादा थी. 2025 में 88 और नए कैंपों के अंदरूनी नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थापना की प्लानिंग की जा रही है. कुल मिलाकर नक्सलवाद के खिलाफ कड़ा प्रहार कैसे हो इस रणनीति के साथ-साथ इन इलाकों में विकास हो यह भी योजना बनाई जा रही है.














