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भारत पर दुनिया का भरोसा बढ़ा… पीएम मोदी ने किया सेमीकॉन इंडिया का उद्घाटन, बोले- ग्लोबल मार्केट तक पहुंच रहीं देश की सेमीकंडक्टर चिप्स

उमाकांत त्रिपाठी।Semicon India 2026 के पांचवें संस्करण का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में उद्घाटन किया। तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन में दुनिया की प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनियां, उद्योग विशेषज्ञ, निवेशक, स्टार्टअप, शोधकर्ता और नीति निर्माता हिस्सा ले रहे हैं। इस साल कार्यक्रम की थीम ‘Silicon to Systems: Building the Ecosystem’ रखी गई है। सरकार के मुताबिक आयोजन में 600 से ज्यादा प्रदर्शक और 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हो रही हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एक तरफ भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया का भारत पर भरोसा भी बढ़ रहा है। उन्होंने भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में हो रही प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि देश में तैयार हो रही चिप्स अब भारतीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंचने लगी हैं।

पीएम मोदी ने हालिया आर्थिक आंकड़ों का भी जिक्र किया। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत की वास्तविक GDP ग्रोथ 7.8% रही। इसी अवधि के आसपास जापान की Japan Credit Rating Agency यानी JCR ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को BBB+ से बढ़ाकर A- कर दिया था और आउटलुक Stable रखा था।

सेमीकंडक्टर सेक्टर में लंबे समय की तैयारी जरूरी

पीएम मोदी ने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां केवल फैक्ट्री लगाने के बाद काम पूरा हो जाता है। इसके लिए टेक्नोलॉजिकल क्षमता, डिजाइन, रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग और पूरे सप्लाई चेन इकोसिस्टम को विकसित करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि भारत ने एक साथ कई स्तरों पर काम किया है। इनमें चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग कैपेबिलिटी शामिल हैं। सरकार का जोर अब केवल चिप उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी वैल्यू चेन को देश में विकसित करने पर है।

सरकार के अनुसार Semicon India Programme के तहत अब तक 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं। इनमें से तीन प्रोजेक्टों ने कमर्शियल प्रोडक्शन भी शुरू कर दिया है। इसी क्रम को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने Semicon 2.0 को मंजूरी दी है।

Semicon 2.0 के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का बजट

पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत की जानकारी दी। सरकार ने Semicon 2.0 के लिए कुल ₹1,27,500 करोड़ के बजट प्रावधान को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को अगले स्तर पर ले जाना है।

Semicon 2.0 को छह प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इनमें चिप डिजाइन, मशीन और मटेरियल, ज्यादा फैब स्थापित करना, ATMP/OSAT क्षमता को मजबूत करना, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टैलेंट डेवलपमेंट शामिल हैं।

सरकार का लक्ष्य भारत को केवल चिप असेंबली या टेस्टिंग का केंद्र बनाने के बजाय डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी तक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है।

AI के दौर में Compound Semiconductor और Silicon Photonics पर जोर

पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के लिए एडवांस सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने Compound Semiconductor Manufacturing और Silicon Photonics जैसी तकनीकों को इकोसिस्टम में शामिल करने की जरूरत बताई।

AI डेटा सेंटर में बड़ी संख्या में हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर एक साथ काम करते हैं। ये प्रोसेसर भारी मात्रा में डेटा को तेजी से प्रोसेस करते हैं। ऐसे में केवल चिप की क्षमता ही नहीं, बल्कि डेटा सेंटर के लिए ऊर्जा की उपलब्धता और ऊर्जा सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

सरकार Semicon 2.0 के तहत एडवांस टेक्नोलॉजी, नए डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च क्षमता विकसित करने पर जोर दे रही है।

Supply Chain मजबूत करने पर भारत का फोकस

पीएम मोदी ने कहा कि सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करना आज पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। दुनिया में सेमीकंडक्टर की मांग लगातार बढ़ रही है और कई देश अपनी सप्लाई चेन को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना चाहते हैं।

भारत इसी अवसर को ध्यान में रखते हुए चिप निर्माण से जुड़े उपकरण, सामग्री, केमिकल्स और गैसों के उत्पादन पर भी ध्यान दे रहा है। Semicon 2.0 में मशीनों और मटेरियल के क्षेत्र को भी एक अलग स्तंभ के रूप में शामिल किया गया है।

पीएम मोदी ने वैश्विक इक्विपमेंट कंपनियों से भारत में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित होने से वैश्विक सप्लाई चेन को भी मजबूती मिल सकती है।

विदेशी कंपनियों और भारतीय स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर

पीएम मोदी ने कहा कि इंटरनेशनल कंपनियां अब भारतीय स्टार्टअप्स, डिजाइन फर्म्स और OCI के स्वामित्व वाली संस्थाओं के साथ भी सहयोग कर सकती हैं। सरकार ने इस क्षेत्र में पॉलिसी, फंडिंग और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मजबूत करने पर काम किया है।

भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन से जुड़े स्टार्टअप्स और संस्थानों को भी सरकारी योजनाओं के जरिए समर्थन दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार 105 स्टार्टअप्स चिप डिजाइन से जुड़े काम पर आगे बढ़ चुके हैं, जबकि देश के कई शैक्षणिक संस्थानों में आधुनिक EDA टूल्स के जरिए छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

भारत में Chip Design और Intellectual Property पर जोर

पीएम मोदी ने भारत में ज्यादा से ज्यादा Fabless Semiconductor Companies विकसित करने की जरूरत बताई। Fabless कंपनियां मुख्य रूप से चिप डिजाइन और उससे जुड़ी तकनीक पर काम करती हैं, जबकि उत्पादन का काम अलग मैन्युफैक्चरिंग फैब में किया जाता है।

भारत का लक्ष्य सिर्फ दूसरी कंपनियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग बेस बनना नहीं, बल्कि अपने यहां चिप डिजाइन और Intellectual Property यानी IP भी तैयार करना है।

इसी वजह से Semicon 2.0 में डिजाइन और रिसर्च को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आगे भारत में नए IP, चिप डिजाइन और सिस्टम विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

युवाओं और Industry को R&D बढ़ाने की अपील

पीएम मोदी ने भारत में रिसर्च कर रहे युवाओं से आगे आने और विदेशों में रिसर्च कर रहे भारतीय युवाओं से देश में एडवांस टेक्नोलॉजी के विकास से जुड़ने की अपील की।

उन्होंने इंडस्ट्री लीडर्स से भी भारत में Research and Development यानी R&D को बढ़ाने को कहा। सेमीकंडक्टर सेक्टर में तकनीक तेजी से बदलती है, इसलिए नई पीढ़ी के चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी के लिए लगातार रिसर्च जरूरी है।

सरकार के Semicon 2.0 कार्यक्रम में R&D को भी प्रमुख स्तंभ बनाया गया है। इसके तहत भारत में अधिक एडवांस नोड और दूसरी उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों के विकास पर जोर दिया जाएगा।

‘Tape-Out’ के बाद भी खत्म नहीं होता चिप का सफर

पीएम मोदी ने अपने भाषण में सेमीकंडक्टर डिजाइन की प्रक्रिया को समझाते हुए ‘Tape-Out’ का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जब चिप का डिजाइन पूरा हो जाता है और उसे उत्पादन के लिए भेजा जाता है, तो इस प्रक्रिया को Tape-Out कहा जाता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि काम यहीं खत्म हो गया। इसके बाद अगली पीढ़ी की बेहतर चिप तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होती है। यही लगातार रिसर्च और इनोवेशन सेमीकंडक्टर उद्योग को आगे बढ़ाता है।

भारत में इसी तरह लगातार नई तकनीक और डिजाइन क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की योजना चिप डिजाइन से लेकर फैब, पैकेजिंग, टेस्टिंग, मशीन, मटेरियल और टैलेंट तक पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने की है।

पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें

  1. Semicon 2.0 की शुरुआत: भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके लिए ₹1,27,500 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
  2. AI टेक्नोलॉजी पर फोकस: Compound Semiconductors और Silicon Photonics जैसी तकनीकों को आगे बढ़ाने पर जोर है।
  3. Supply Chain मजबूत करने की तैयारी: भारत सेमीकंडक्टर से जुड़ी वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका बढ़ाने पर काम कर रहा है।
  4. विदेशी कंपनियों के लिए सहयोग: इंटरनेशनल कंपनियों के लिए भारतीय स्टार्टअप्स और डिजाइन फर्म्स के साथ सहयोग के रास्ते खोले जा रहे हैं।
  5. वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका: भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम मजबूत होने से वैश्विक सप्लाई चेन को भी फायदा हो सकता है।
  6. Energy Security जरूरी: AI डेटा सेंटर में हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर के बढ़ते इस्तेमाल के कारण ऊर्जा की जरूरत भी बढ़ रही है।
  7. युवाओं से Research की अपील: भारत और विदेशों में रिसर्च कर रहे युवाओं को एडवांस टेक्नोलॉजी के विकास से जोड़ने पर जोर दिया गया।
  8. Industry R&D बढ़ाए: पीएम ने उद्योगों से भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट को मजबूत करने की अपील की।
  9. Chip Design और IP पर फोकस: भारत में Fabless कंपनियों और सेमीकंडक्टर IP को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
  10. Tape-Out के बाद अगली चिप: पीएम ने कहा कि एक चिप का डिजाइन उत्पादन के लिए भेजे जाने के बाद भी अगली बेहतर चिप पर काम शुरू हो जाता है।

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