उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘कूटनीतिक जादू’ से प्रभावित होकर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा दिसानायके ने भारत विरोधी रुख को छोड़ दिया है. दोनों नेताओं ने अपने-अपने देशों में सत्ता में आने से पहले एक मजबूत भारत विरोधी नीति का समर्थन किया था. अब दोनों नई दिल्ली के प्रति अपने दृष्टिकोण में एक बड़ा बदलाव करते दिख रहे हैं, ऐसा बुधवार को श्रीलंकाई मीडिया ने कहा. ये टिप्पणियां दिसानायके की 28-30 जुलाई को मालदीव की चल रही राजकीय यात्रा के दौरान की गईं, जो पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक माले यात्रा के लगभग तुरंत बाद हुई थी.
एक रिपोर्ट में कहा गया,कि- पीएम मोदी की मालदीव यात्रा समाप्त होने के साथ ही, श्रीलंका के चीन समर्थक संयुक्त विकास पार्टी (JVP) नेता, राष्ट्रपति अनुरा, निमंत्रण पर मालदीव गए हैं. अनुरा और संयुक्त विकास पार्टी (JVP) के साथ वही हुआ जो मालदीव के राष्ट्रपति के साथ हुआ था. सत्ता में आने से पहले उन्होंने भारत विरोधी नीति का भी जोरदार प्रदर्शन किया था.’ पिछले दिसंबर में, पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा पर भारत आए दिसानायके ने अभूतपूर्व आर्थिक संकट के दौरान भारत के ‘अत्यधिक समर्थन’ के लिए धन्यवाद दिया था. साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को यह आश्वासन भी दिया था कि वह इस द्वीपीय राष्ट्र का इस्तेमाल भारत के हितों के लिए किसी भी तरह से हानिकारक नहीं होने देंगे.
मालदीव की यात्रा पर गए थे पीएम मोदी
25 जुलाई को, प्रधानमंत्री मोदी मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने के लिए दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर माले पहुंचे. यह प्रधानमंत्री मोदी की मालदीव की तीसरी यात्रा थी. इससे पहले उन्होंने 2018 और 2019 में हिंद महासागर द्वीपसमूह का दौरा किया था, और नवंबर 2023 में शुरू होने वाले मोहम्मद मुइज्जू के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान किसी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के प्रमुख द्वारा मालदीव की यह पहली यात्रा थी.
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एक विशेष सम्मान के रूप में, राष्ट्रपति मुइज्जू ने माले एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया. मालदीव के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और गृह सुरक्षा मंत्री भी प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए एयरपोर्ट पर मौजूद थे.
मालदीव ने बदली थी अपनी नीति
परंपरा से हटकर, मुइज्जू ने राष्ट्रपति पद संभालने के बाद भारत की अपनी पहली राजकीय यात्रा नहीं की, जिससे उनकी विदेश नीति में स्पष्ट बदलाव का संकेत मिलता है. उन्होंने चीनी अनुसंधान पोत जियांग यांग होंग 3, जिसे एक निगरानी पोत माना जाता है, को अपने जलक्षेत्र में आने की अनुमति दी. इससे क्षेत्र में पनडुब्बी अभियानों के लिए चीन द्वारा संभावित डेटा संग्रह को लेकर भारत की चिंताएं बढ़ गईं.
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हालांकि, अक्टूबर में मुइज्जू की भारत की पांच दिवसीय राजकीय यात्रा, जो प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल होने के बाद चार महीनों में यह उनकी दूसरी भारत यात्रा थी. इस यात्रा ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बदलाव को उजागर किया. मुइज्जू, जिन्होंने पहले हिंद महासागर द्वीप समूह में ‘इंडिया आउट’ अभियान का समर्थन किया था, अब चीन के साथ देश के संबंधों को संतुलित करते हुए जटिल संबंधों को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे. इस वर्ष, पहले छह महीनों में ही, नई दिल्ली में मालदीव से लगभग छह मंत्रिस्तरीय दौरे हो चुके हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर की 2025 में पहली मुलाकात मालदीव के विदेश मंत्री के साथ हुई थी.












