उमाकांत त्रिपाठी। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को सहकारी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इस नई राष्ट्रीय नीति की घोषणा की। इसका लक्ष्य प्रत्येक गांव में अधिक पेशेवर रूप से प्रबंधित और वित्तीय रूप से स्वतंत्र सहकारी संगठन बनाना है। यह 2025 से 2045 तक अगले दो दशकों के लिए भारत के सहकारी आंदोलन में एक मील का पत्थर साबित होगा।
23 साल बाद आई नई घोषणा
यह नई घोषणा 23 साल बाद आई है, जब सहकारी समितियों के लिए इसी प्रकार की नीति 2002 में लाई गई थी, जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सत्ता में था। ‘राष्ट्रीय सहकारिता नीति – 2025’ का अनावरण करते हुए शाह (जो गृह और सहकारिता मंत्रालय दोनों संभाल रहे हैं) ने कहा कि सहकारिताएं कराधान सहित सभी पहलुओं में कॉर्पोरेट क्षेत्र के बराबर हैं।
जल्द लागू करें नई नीति
उन्होंने राज्यों से नई नीति को जल्द से जल्द लागू करने का आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि सहकारी क्षेत्र में भारत के लिए विकास लाने की क्षमता है, जिसका लक्ष्य 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य सहकारी संगठनों को पेशेवर, पारदर्शी, प्रौद्योगिकी से लैस, वित्तीय रूप से स्वतंत्र और सफल बनाना है।
सहकारिता के दायरे में आएं 50 करोड़ लोग
इसके अलावा, इसका उद्देश्य कम से कम 50 करोड़ लोगों को सहकारिता के दायरे में लाना है। मंत्री ने कहा, “यह नीति दूरदर्शी, व्यावहारिक और परिणाम लाने वाला है।” उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार ने 2027 तक भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि हम इस लक्ष्य को जरूर हासिल करेंगे।” शाह ने कहा कि पिछले 4 वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि आज देश की सबसे छोटी सहकारी इकाई का सदस्य भी गर्व से खड़ा है।












