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पीएम मोदी के रूस दौरे का असर: आग उगलने वाले तुर्किये के तेवर ढीले, एर्दोगन ने दिया ये बयान

उमाकांत त्रिपाठी। भारत के खिलाफ आग उगलने का कोई मौका न चूकने वाला तुर्किये। कश्मीर पर पाकिस्तान की भाषा बोलने वाला तुर्किये। भारत-विरोधी जहरीले बोल के लिए चर्चित तुर्किये के राष्ट्रपति रिचेप तैयब एर्दोगन। लेकिन लगता है उसके सुर थोड़े ढीले पड़े हैं। पिछले महीने एर्दोगन ने यूएन में दिए अपने भाषण में कश्मीर के जिक्र से परहेज किया। अब उनके दफ्तर ने उस मीडिया रिपोर्ट को खारिज किया है जिसमें दावा किया गया है कि भारत के विरोध के बाद BRICS में एंट्री की तुर्किये की कोशिश नाकाम हो गई। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत नहीं चाहता कि कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के करीबी दोस्त तुर्किये को तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं वाले समूह में शामिल किया जाए।

तुर्किये बोले-भारत ने BRICS समूह में शामिल होने का विरोध किया था
तुर्किये ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि- भारत ने BRICS समूह में उसके शामिल होने का विरोध किया था। आपकों बता दें कि- हाल ही में रूस के कजान में खत्म हुए BRICS सम्मेलन में तुर्किये को इस समूह में पार्टनर देश के रूप में शामिल करने का फैसला लिया गया था। इससे एक दिन पहले, एक जर्मन टेबलॉयड ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि भारत ने BRICS में तुर्किये की एंट्री का विरोध किया था। अंकारा ने एक आधिकारिक बयान में इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।यह खबर जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज की तीन दिवसीय भारत यात्रा से ठीक पहले आई थी, जो 25 अक्टूबर से शुरू हुई थी। तुर्किये उन 13 देशों में से एक है जिन्हें इस साल BRICS के पार्टनर देशों में शामिल होने को मंजूरी मिली थी। कश्मीर मुद्दे पर तुर्किये अक्सर पाकिस्तान की भाषा बोलता है। लेकिन अब लगता है कि इसमें बदलाव आया है।

तुर्किये के राष्ट्रपति संयुक्त राष्ट्र के अपने भाषणों में उठाते है कश्मीर का मुद्दा
तुर्कये के राष्ट्रपति रिचेप तैयब एर्दोगन संयुक्त राष्ट्र के अपने भाषणों में लगातार कश्मीर का मुद्दा उठाते रहे हैं लेकिन इस साल के भाषण में वह कुछ बदले-बदले से नजर आए थे। सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कश्मीर मुद्दे का जिक्र करने से परहेज किया। जहां कुछ लोगों ने इसे अक्टूबर के अंत में रूस में BRICS शिखर सम्मेलन से पहले समर्थन हासिल करने की एर्दोगन की रणनीति के रूप में देखा, वहीं कुछ अन्य ने कहा कि यह महत्वपूर्ण था क्योंकि यह जम्मू-कश्मीर में चुनावों के बीच में आया था।

BRICS दुनिया की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है

इस साल संयुक्त राष्ट्र की बैठक में, एर्दोगन ने गाजा पर निष्क्रियता के लिए संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की थी और इजरायल पर फिलिस्तीनी क्षेत्र को बच्चों और महिलाओं के सबसे बड़े कब्रिस्तान में बदलने का आरोप लगाया था।BRICS शिखर सम्मेलन के अलावा, तुर्किये भारत में अपने निवेश का विस्तार करने और उसके बाजारों का दोहन करने की भी कोशिश कर रहा है। एर्दोगान ने आखिरी बार 2023 में G20 शिखर सम्मेलन के लिए भारत की यात्रा की थी और अपनी इस यात्रा को सकारात्मक रूप से समाप्त किया था।BRICS दुनिया की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सदस्य है। इन्हीं देशों के नामों के पहले अक्षर को लेकर समूह का नाम BRICS पड़ा है।

 

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