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पुणे में विदेश मंत्री एस जयशंकर: ग्लोबल साउथ पर ये बोले विदेश मंत्री, समझाया इसका मतलब

उमाकांत त्रिपाठी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि- ग्लोबल साउथ को भारत से बहुत उम्मीदें हैं। उन्हें भारत पर बहुत भरोसा है। फ्लेम यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में विदेश मंत्री ने बताया कि आखिर क्यों ग्लोबल साउथ को भारत पर भरोसा और उम्मीदें हैं। उन्होंने इसके लिए तीन उदाहरण दिए जिनमें कोरोना महामारी के दौरान ग्लोबल साउथ के देशों को भारत की तरफ से की गई मदद, रूस यूक्रेन युद्ध और नई दिल्ली जी-20 समिट के दौरान अफ्रीकन यूनियन को सदस्यता दिलाने का जिक्र किया।एस. जयशंकर ने ग्लोबल साउथ का मतलब भी समझाया और बताया कि कैसे ग्लोबल साउथ के देशों में काफी समानता है। उन्होंने कहा, ‘ग्लोबल साउथ से हमारा क्या मतलब है? हमारा मतलब मुख्य रूप से उन देशों से है जो उपनिवेश थे, जिन्हें अपनी स्वतंत्रता मिली या जो अभी भी विकासशील हैं, जो बड़े पैमाने पर कम आय वाले देश होंगे

विदेश मंत्री ग्लोबल साउथ के देश भारत पर करते है बहुत भरोसा
विदेश मंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश भारत पर बहुत ज्यादा भरोसा करते हैं। उम्मीद रखते हैं। उन्होंने कहा,कि-उनका (ग्लोबल साउथ के देश) भारत पर बहुत अधिक भरोसा है। उन्हें भारत से उम्मीद है और इसके पीछे एक कारण भी है। मैं आपको तीन उदाहरण दे सकता हूं।जयशंकर के आगे कहा,कि-ग्लोबल साउथ के अधिकांश लोगों को याद है कि कोविड के दौरान जब विकसित दुनिया वास्तव में टीकों की जमाखोरी कर रही थी, उनमें से कई ने भारत से अपने पहले टीके हासिल किए। वो भी तब जब भारत अभी भी अपने लोगों को टीका लगा रहा था। मैं दुनिया पर इसके भावनात्मक प्रभाव को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बता सकता।बोले-

विदेश मंत्री ने कहा,कि-दूसरा उदाहरण यूक्रेन था…तीसरा उदाहरण हमारे G20 के दौरान दिखा। G20 में कई वर्षों तक, अफ्रीकन यूनियन एक सीट चाहता था। हर G20 इसी तरह शुरू होता था। G20 के पहले दिन, हर कोई अफ्रीकन यूनियन से कहता था कि चिंता न करें, इस बैठक के दौरान हम आपका ख्याल रखेंगे लेकिन बैठक के अंत में जब कुछ नहीं होता था, तो वे कहते थे, माफ कीजिए, इस बार हम ऐसा नहीं कर सके, लेकिन अगली बार पक्का हम इस पर विचार करेंगे…अफ्रीकी देशों को ऐसा लगता है कि भारत के पास अंतरात्मा है। भारत के पास एक प्रतिष्ठा है, उसका एक रुख है, भारत के पास आज आत्मविश्वास है.

भारत में कोविड वैस्सीन को लेकर बोले-विदेश मंत्री
यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में जयशंकर कोरोना काल के उस भयानक दौर की याद दिलाई जब गरीब देश वैक्सीन के लिए तरस रहे थे। कुछ चुनिंदा देश ही वैक्सीन बनाने पर काम कर रहे थे, उनमें भारत भी था। उस वक्त अमेरिका जैसे अमीर देशों ने वैक्सीन की जमाखोरी कर ली थी। एक तरफ गरीब देश वैक्सीन की पहली डोज तक के लिए तरस रहे थे दूसरी तरफ ये देश अपने नागरिकों की दूसरी डोज या फिर बूस्टर डोज के लिए वैक्सीन जमा कर रहे थे। उस वक्त भारत ने गरीब देशों की मदद की। उसने अपने नागरिकों के लिए व्यापाक तौर पर वैक्सीनेशन शुरू करने से पहले ही तमाम देशों को वैक्सीन की सप्लाई भेजी। अभी भारत में सिर्फ कोरोना वॉरियर्स और बुजुर्ग या फिर को-मॉर्बिडिटी वाले मरीजों को ही वैक्सीन लग रही थी, तब तमाम देशों को नई दिल्ली ने मुफ्त में वैक्सीन की सप्लाई की थी।

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