उमाकांत त्रिपाठी।झांसी के बबीना थाने में पिता के सामने बेटी, सिपाही के साथ जाने की जिद पर अड़ गई। मनाने के बाद भी वह नहीं मानी। मान-मनौव्वल का दौर चल रहा था, तभी अचानक पिता की तबीयत बिगड़ गई और वह अचेत होकर गिर पड़े। पहले चर्चा थी कि पिता ने जहर खा लिया। पुलिस आनन-फानन में उन्हें सीएचसी ले गई, जहां से झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। हालांकि, जहर की पुष्टि नहीं हुई।
दरअसल, पिता ने बेटी का रिश्ता वनकर्मी से तय किया था, लेकिन वह सिपाही से प्यार करती थी। 3 दिसंबर को लड़की की सगाई हुई। अगले दिन वह घर से भाग गई और प्रयागराज के मंदिर में सिपाही के साथ सात फेरे लिए। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट में सुरक्षा की गुहार लगाते हुए याचिका भी दाखिल कर दी।
पिता ने 6 दिसंबर को सिपाही पर बेटी की हत्या करने के लिए अपहरण का आरोप लगाते हुए तहरीर दे दी। पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी। इसके बाद सिपाही ने थाना प्रभारी को कॉल किया। कहा कि लड़की मेरे साथ है। बुधवार को पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया। करीब एक घंटे तक पंचायत चली, लेकिन युवती ने पिता की बात नहीं मानी। वह कहने लगी कि वह सिपाही के साथ ही रहेगी।
6 साल से सिपाही से अफेयर था
बबीना के मुरारी गांव की रहने वाली नम्रता (22) ने पुलिस को बताया- मैं बीए पास हूं। गांव के गोलू भार्गव से मेरी 6 साल पहले दोस्ती हो गई। हम दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। बाद में दोस्ती प्यार में बदल गई। गोलू, कानपुर की 37वीं पीएसी वाहिनी में सिपाही है।हम दोनों शादी करना चाहते थे। जब मैंने अपने परिवार को बताया तो वे इस रिश्ते से खुश नहीं थे। मैं एक साल से परिवार को मना रही थी, मगर वे शादी के लिए राजी नहीं हो रहे थे। इस बीच उन्होंने मेरा रिश्ता वन विभाग के सरकारी कर्मचारी से तय कर दिया।
भागकर प्रयागराज में शादी की
नम्रता ने बताया कि- 3 दिसंबर को मेरी सगाई हुई, मगर मैं अपना प्यार हर कीमत पर पाना चाहती थी। 4 दिसंबर को मैं घर से बहाना बनाकर निकली और अपने बॉयफ्रेंड गोलू को बुला लिया। फिर मैं उसी के साथ चली गई। मैं- और गोलू प्रयागराज हाईकोर्ट पहुंचे। वहां 5 दिसंबर को मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली। फिर हमने हाईकोर्ट में सुरक्षा की गुहार लगाते हुए याचिका दाखिल कर दी।














