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S Janaki Death: आज शाम होगा गायिका एस जानकी का अंतिम संस्कार, PM मोदी ने श्रद्धांजलि दी, ‘यार बिना चैन’ समेत 48 हजार गाने गाए थे

उमाकांत त्रिपाठी। S Janaki Death की खबर ने भारतीय संगीत जगत को गहरे शोक में डाल दिया है। भारतीय फिल्म संगीत की सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित गायिकाओं में शामिल मशहूर प्लेबैक सिंगर एस. जानकी का शनिवार को मैसूर के एक निजी अस्पताल में 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। शुक्रवार रात उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके निधन की खबर सामने आते ही देशभर के संगीत प्रेमियों, फिल्म कलाकारों और राजनीतिक हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया। रविवार सुबह उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए मैसूर के महाराजा ग्राउंड में रखा गया, जहां बड़ी संख्या में प्रशंसक और कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उनका अंतिम संस्कार रविवार शाम 5 बजे मैसूर के एचडी कोटे तालुक स्थित उनके पैतृक फार्महाउस में किया जाएगा।

## छह दशक तक भारतीय संगीत जगत पर किया राज

एस. जानकी भारतीय फिल्म संगीत का ऐसा नाम हैं, जिन्होंने करीब 60 वर्षों तक अपनी आवाज से करोड़ों लोगों के दिलों पर राज किया।

उन्होंने अपने शानदार करियर में 48 हजार से अधिक गीत रिकॉर्ड किए, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाती है। उन्होंने हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और कई अन्य भारतीय भाषाओं में भी हजारों गीत गाए।

उनकी मधुर आवाज और भावपूर्ण गायकी ने उन्हें देश की सबसे बहुमुखी गायिकाओं में शामिल कर दिया। संगीत प्रेमी उन्हें प्यार से “जानकी अम्मा” के नाम से भी जानते थे।

## हिंदी फिल्मों में भी छोड़ी अमिट पहचान

हालांकि एस. जानकी दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी गायिकाओं में गिनी जाती थीं, लेकिन उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी कई यादगार गीत गाए।

उनके कुछ लोकप्रिय हिंदी गीतों में शामिल हैं—

बोल बेबी बोल (मेरी जंग)
प्रभु मोरे अवगुण (सुर संगम)
ओ मारिया (सागर)
गोपाला-गोपाला (हमसे है मुकाबला)

इन गीतों ने उन्हें पूरे देश में लोकप्रिय बना दिया। उनकी आवाज की खासियत यह थी कि वह हर भाव—रोमांस, भक्ति, विरह और खुशी—को बेहद सहजता से प्रस्तुत कर देती थीं।

## 1957 में शुरू हुआ था संगीत का सफर

एस. जानकी ने अपने गायन करियर की शुरुआत वर्ष 1957 में की थी।

उनका पहला हिंदी गीत 1958 में रिलीज हुई फिल्म ‘मिस 58’ में था, जिसका संगीत प्रसिद्ध संगीतकार जी. रामनाथन ने तैयार किया था।

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। धीरे-धीरे वह भारतीय सिनेमा की सबसे व्यस्त और लोकप्रिय पार्श्व गायिकाओं में शामिल हो गईं।

उनकी आवाज कई पीढ़ियों के कलाकारों की पहचान बन गई और उन्होंने देश के लगभग सभी बड़े संगीतकारों के साथ काम किया।

## एसपी बालसुब्रह्मण्यम के साथ रही ऐतिहासिक जोड़ी

भारतीय संगीत इतिहास में एस. जानकी और एसपी बालसुब्रह्मण्यम (SP Balasubrahmanyam) की जोड़ी को सबसे सफल गायन जोड़ियों में गिना जाता है।

दोनों ने हजारों डुएट गीत रिकॉर्ड किए, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

उनकी जुगलबंदी ने दक्षिण भारतीय सिनेमा के साथ-साथ पूरे भारतीय फिल्म संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

## चार राष्ट्रीय पुरस्कार और कई सम्मान

एस. जानकी को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मान मिले।

उन्हें चार बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Award) से सम्मानित किया गया।

इसके अलावा विभिन्न राज्यों की सरकारों ने भी उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा।

उनकी गायकी को भारतीय संगीत की सबसे समृद्ध विरासतों में गिना जाता है।

## पद्म भूषण सम्मान स्वीकार करने से किया था इनकार

वर्ष 2013 में भारत सरकार ने एस. जानकी को पद्म भूषण देने की घोषणा की थी।

हालांकि उन्होंने यह सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

उस समय उन्होंने कहा था कि दक्षिण भारत के कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान काफी देर से मिलता है। उनका मानना था कि उन्हें यह सम्मान बहुत पहले मिल जाना चाहिए था।

उनका यह फैसला लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा और उन्होंने इसे कलाकारों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया था।

## 2017 में लिया था गायन से संन्यास

करीब छह दशक तक सक्रिय रहने के बाद एस. जानकी ने वर्ष 2017 में घोषणा की थी कि अब वह नए गीत रिकॉर्ड नहीं करेंगी।

उन्होंने कहा था—

“मैं बहुत गा चुकी हूं, अब आराम करना चाहती हूं।”

मैसूर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने लंबे और सफल संगीत सफर को विराम दिया।

## प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू ने जताया शोक

S Janaki Death पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एस. जानकी की आवाज ने हर भावना को बेहद खूबसूरती से लोगों तक पहुंचाया और उनका संगीत हमेशा जीवित रहेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें भारतीय संगीत जगत की “अमूल्य धरोहर” बताया और कहा कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय सहित कई राजनीतिक नेताओं और फिल्मी हस्तियों ने भी उनके निधन को भारतीय संगीत जगत की अपूरणीय क्षति बताया।

## भारतीय संगीत ने खो दिया एक युग

S Janaki Death केवल एक महान गायिका का निधन नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत भी माना जा रहा है।

48 हजार से अधिक गीत, छह दशक लंबा शानदार करियर, चार राष्ट्रीय पुरस्कार और करोड़ों प्रशंसकों का प्यार—एस. जानकी ने अपने जीवन में वह मुकाम हासिल किया जिसे बहुत कम कलाकार छू पाते हैं।

आज भले ही उनकी आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई हो, लेकिन उनके गीत आने वाली कई पीढ़ियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजते रहेंगे। भारतीय फिल्म संगीत में उनका योगदान हमेशा अमर रहेगा।

 

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