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Datia By Election 2026: CM मोहन से मुलाकात के बाद अचानक दिल्ली रवाना हुए नरोत्तम मिश्रा, बीजेपी से इस्तीफा देने की भी अटकलें .?

Datia By Election 2026 को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। टिकट बदलने के फैसले के बाद जहां समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया, वहीं अब नरोत्तम मिश्रा के रुख में बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने संगठन को सर्वोपरि बताते हुए पार्टी उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान किया है।

दतिया में पिछले दो दिनों से जारी राजनीतिक हलचल के बीच नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने साफ किया कि वे पार्टी के फैसले का सम्मान करेंगे और भाजपा प्रत्याशी के नामांकन में भी शामिल होंगे।

 टिकट कटने के बाद मचा था राजनीतिक बवाल

दतिया विधानसभा सीट पर भाजपा की ओर से आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। कुछ स्थानों पर सड़क जाम, नारेबाजी और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं भी सामने आईं।


स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। विरोध के दौरान कई भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अपने पदों से इस्तीफा देने की घोषणा भी कर दी।

इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा शुरू हो गई थी कि नरोत्तम मिश्रा निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। विपक्षी दलों ने भी इस मौके पर भाजपा पर निशाना साधा और अलग-अलग तरह की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

 संगठन के फैसले को स्वीकार किया

राजनीतिक घटनाक्रम के बीच शनिवार को भोपाल में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद नरोत्तम मिश्रा का रुख पूरी तरह बदला हुआ नजर आया।

मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है और सभी कार्यकर्ताओं को संगठन के साथ खड़ा रहना चाहिए। उन्होंने अपने समर्थकों से भी शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन से बचने की अपील की।

नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि दतिया में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी कार्यकर्ता मिलकर काम करेंगे और वे स्वयं भी भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के नामांकन में शामिल होंगे।

 दिल्ली दौरे को लेकर बढ़ी राजनीतिक चर्चाएं

भोपाल में बैठक के बाद नरोत्तम मिश्रा दिल्ली रवाना हो गए। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार वे भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं।

हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन माना जा रहा है कि दतिया उपचुनाव और भविष्य की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व ने वरिष्ठ नेता होने के नाते नरोत्तम मिश्रा को सम्मानजनक भूमिका देने का भरोसा दिया है, जिसके बाद उनके बयान में नरमी देखने को मिली।

 भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने क्या कहा

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवार में कोई बदलाव नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि आशुतोष तिवारी ही भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार हैं और पूरा संगठन उनके समर्थन में चुनाव लड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कार्यकर्ताओं ने भावनाओं में आकर इस्तीफे दिए हैं, लेकिन किसी भी इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया जाएगा। पार्टी सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चुनाव मैदान में उतरेगी।

 विपक्ष ने साधा निशाना

दतिया के राजनीतिक घटनाक्रम पर कांग्रेस ने भाजपा पर जमकर हमला बोला है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा के भीतर ही असंतोष खुलकर सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि दतिया की जनता इस बार भाजपा को जवाब देगी।

कांग्रेस नेताओं ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए और विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी टिप्पणी की।

 दतिया उपचुनाव क्यों हो रहा है?

दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि वर्ष 2023 में निर्वाचित कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता अदालत से जुड़े एक मामले के बाद समाप्त हो गई थी।

इसके बाद निर्वाचन आयोग ने सीट पर उपचुनाव की घोषणा की।

भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा है।

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार:

मतदान: 30 जुलाई 2026
मतगणना: 3 अगस्त 2026

चुनावी मुकाबले पर सबकी नजर

Datia By Election 2026 अब केवल एक विधानसभा उपचुनाव नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति का प्रतिष्ठित मुकाबला बन चुका है।

टिकट बदलने के बाद भाजपा के भीतर असंतोष जरूर सामने आया, लेकिन अब नरोत्तम मिश्रा द्वारा संगठन के साथ खड़े होने और पार्टी उम्मीदवार के समर्थन की घोषणा से भाजपा एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रही है।

दूसरी ओर कांग्रेस इस घटनाक्रम को भाजपा की आंतरिक कलह बताते हुए चुनावी मुद्दा बनाने में जुटी है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि 30 जुलाई को होने वाले मतदान में दतिया की जनता किसे अपना समर्थन देती है और 3 अगस्त को आने वाले नतीजे प्रदेश की राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं।

 

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