राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू अरुणाचल प्रदेश के 37वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुईं और राज्य सरकार द्वारा उनके सम्मान में ईटानगर में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में भाग लिया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि क्षेत्रफल के लिहाज से पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा राज्य और एक सीमावर्ती राज्य होने के नाते अरुणाचल प्रदेश सामरिक एवं भौगोलिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण राज्य है। राष्ट्रीय सुरक्षा और राज्य के आर्थिक विकास के लिए अच्छा बुनियादी ढांचा आवश्यक है। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 44,000 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि 600 मेगावॉट के कामेंग हाइड्रो पावर स्टेशन के चालू होने के साथ ही अरुणाचल प्रदेश बिजली अधिशेष वाला राज्य बन गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हाल में उदघाटित हर मौसम के लिए अनुकूल डोनयी पोलो हवाई अड्डे से राज्य की कनेक्टिविटी में सुधार होगा और इससे व्यापार एवं पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं के विकास के बिना किसी भी समाज का विकास समावेशी नहीं हो सकता। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि अरुणाचल प्रदेश में पंचायतों की लगभग 47 प्रतिशत प्रतिनिधि महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की महिलाओं को हर क्षेत्र में सफलता मिल रही है। उन्होंने विश्वास जताया किया कि देश भर की महिलाएं अंशु जमसेनपा और तगे रीता ताखे जैसी महिलाओं से प्रेरणा लेंगी। जमसेनपा पांच दिनों में दो बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला हैं और रीता ताखे उद्यम में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के कृषि आधारित स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक ले जा रही हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में सूर्य की पहली किरण अरुणाचल प्रदेश पर पड़ती है। अरुणाचल प्रदेश की विभिन्न जनजातियां, उनकी सांस्कृतिक विरासत और उनकी विविधता में एकता हम सब को प्रेरित करती है। ऐसा कहा जा सकता है कि अरुणाचल प्रदेश के समाज में सूक्ष्म भारत की झलक मिलती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि पहाड़ों, घने जंगलों, झीलों, झरनों और वनस्पतियों एवं जीवों से समृद्ध यह राज्य एक समृद्ध जैव विविधता वाला क्षेत्र है। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि अरुणाचल प्रदेश सरकार ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने और जैव विविधता के संरक्षण के लिए ‘पक्के घोषणा’ को अपनाया है। उन्हें यह जानकर भी प्रसन्नता हुई कि राज्य सरकार द्वारा कृषि, बागवानी, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ये महत्वपूर्ण कदम हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश सहित पूरा पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि जी-20 की कई बैठकें भी पूर्वोत्तर राज्यों में आयोजित की जा रही हैं। उन्हें विश्वास जताया कि इन बैठकों से पूर्वोत्तर राज्यों की संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं पैदा होंगी।














