दिल्ली

संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति का अभिभाषण: 50 मिनट में द्रौपदी मुर्मू ने कही ये बड़ी बातें, विपक्ष ने नीट पर मचाया हंगामा

उमाकांत त्रिपाठी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के संयुक्त सत्र में 50 मिनट का अभिभाषण दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि- मैं 18वीं लोकसभा के सदस्यों को बधाई देती हूं। आप देश के मतदाताओं का विश्वास जीत कर आए हैं। ये सौभाग्य कम लोगों को मिलता है। मुझे आशा है आप इसे निभाएंगे। राष्ट्रपति ने कहा- मेरी सरकार नॉर्थ-ईस्ट में स्थायी शांति के लिए काम कर रही। उनके यह कहते ही विपक्ष ने शोर मचाना शुरू कर दिया। विपक्ष के शोरगुल के बीच राष्ट्रपति ने अपना अभिभाषण जारी रखा। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में जैसे ही नई शिक्षा नीति का जिक्र किया, विपक्ष ने नीट-नीट के नारे लगाना शुरू कर दिया।

राष्ट्रपति के अभिभाषण की बड़ी बातें

राष्ट्रपति बोलीं- इस संकल्प की सिद्धि में अवरोध न हो ये हम सभी का दायित्व और कर्तव्य है। जब संसद सुचारू चलती है, स्वस्थ्य चर्चा होती है। लोगों का विश्वास पूरी व्यवस्था पर बढ़ता है। जब भारत विकसित राष्ट्र बनेगा तो इसमें आपकी भी सहभागिता होगी। आने वाला दौर भारत का है, सदी भारत की है, इसका असर हजार साल तक रहेगा।

आप सभी जानते हैं आज का समय पूरी तरह से भारत के लिए अनुकूल है। आज क्या नीतियां, निर्णय बनते हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजर है। पिछले दस साल में जो हुआ, उससे हम विकसित भारत बनाने के लिए नई गति प्राप्त कर चुके हैं।

राष्ट्रपति बोलीं- 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है। जम्मू कश्मीर में भी उन जगहों पर संविधान पूरी तरह लागू हो गया है, जहां 370 के कारण यह संभव नहीं था।

राष्ट्रपति ने कहा- आने वाले कुछ महीने में भारत गणतंत्र के रूप में 75 साल पूरे करने जा रहा है। देश में संविधान लागू होने के बाद भी कई बार हमले हुए है। आज 27 जून है, 25 जून 1975 को लागू हुआ आपातकाल संविधान पर हमले का सीधा सबूत है। लेकिन देश ने इससे उबरकर दिखाया।

21वीं सदी के तीसरे दशक में ग्लोबल ऑर्डर एक नई शक्ल ले रहा है। मेरी सरकार के तहत आज भारत को दुनिया को नया भरोसा दे रहा है। कोरोना, युद्ध जैसे हालात में यह साबित हुआ है।

मेरी सरकार विकास के साथ विरासत पर भी काम कर रही है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाएगा। रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती को भी धूमधाम से मनाएगा। एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत तमिल संघम जैसी परंपरा भी हमारी सरकार ने शुरू की है।

नालंदा यूनिवर्सिटी के रूप में एक नया अध्याय जुड़ा है। मुझे विश्वास है कि नई यूनिवर्सिटी इसे ग्लोबल हब बनाने में मददगार होगी।

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