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मुझे उसकी बीवी बहुत पसंद थी.. दोस्त की पत्नी पर आया दिल तो पति के 10 टुकड़े किए, ऐसे शुरू हुआ था दोनों का अवैध रिश्ता

खबर इंडिया की। मुजफ्फरपुर के मुशहरी प्रखंड के बालूघाट में हुआ राकेश हत्याकांड सिर्फ एक मर्डर नहीं था… यह दोस्ती, अवैध शराब और अवैध संबंधों की खतरनाक कहानी है।

राकेश और सुभाष बचपन के दोस्त थे। शराबबंदी के बाद दोनों ने मिलकर अवैध शराब का कारोबार शुरू किया। लेकिन साल 2020 में सिकन्दरपुर पुलिस ने राकेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जेल से छूटने के बाद राकेश दिल्ली कमाने चला गया।

इसी दौरान कहानी ने खतरनाक मोड़ लिया।

राकेश की गैरमौजूदगी में सुभाष का घर आना-जाना बढ़ा। राकेश फोन पर सुभाष से पत्नी और बच्चों का ख्याल रखने को कहता था। लेकिन इसी भरोसे ने रिश्तों को गुनाह में बदल दिया। सुभाष और राकेश की पत्नी राधा के बीच नजदीकियां बढ़ीं। दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने और साथ जीने-मरने की कसमें खाईं।

जब राकेश को इस अफेयर की भनक लगी तो पति-पत्नी के बीच झगड़ा शुरू हो गया। सुभाष को डर था कि सच सामने आया तो दोस्ती, धंधा और जिंदगी सब खत्म हो जाएगा।

फिर रची गई खौफनाक साजिश।

11 सितंबर 2021 को तीज के बहाने राधा ने राकेश को दिल्ली से मुजफ्फरपुर बुलाया। 13 सितंबर की रात सुभाष ने राकेश को अपने कमरे पर बुलाया। दोनों ने साथ खाना खाया। सुभाष ने उसे खूब शराब पिलाई।

जब राकेश बेसुध हो गया, तब सुभाष ने भाला से उसकी गर्दन पर वार किया। खून बहने लगा। फिर तौलिया से गर्दन कस दी। कुछ ही देर में राकेश की मौत हो गई।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

सुभाष ने धारदार हथियार से शव के टुकड़े किए। सिर और धड़ अलग किया, हाथ-पैर काटे और शरीर को नीले ड्रम में भर दिया। शव को गलाने के लिए ड्रम में यूरिया, नमक और फिनाइल डाला गया।

हाथ-पैर के टुकड़े स्कूटी से ले जाकर संगम घाट नदी में फेंक दिए गए। खून से सने कपड़े और बिस्तर मिट्टी में गाड़ दिए गए।

हत्या के पांच दिन बाद यानी 18 सितंबर को उसी कमरे में जोरदार धमाका हुआ।

कमरे में बदबू रोकने के लिए सुभाष अगरबत्ती जलाता था और खिड़की-दरवाजे बंद रखता था। ड्रम में पड़े केमिकल मिश्रण से गैस बनी। जब गैस अगरबत्ती की आग के संपर्क में आई, तो जोरदार ब्लास्ट हो गया।

धमाका इतना तेज था कि आसपास के मकान हिल गए। लोग घरों से बाहर निकल आए। पुलिस और FSL टीम मौके पर पहुंची। मलबे में एक डेड बॉडी मिली। जांच में खुलासा हुआ कि यह राकेश का शव था।

पूरे मामले में सुभाष ने कबूलनामा दिया और हत्या की जिम्मेदारी अपने सिर ली। कोर्ट ने सबूतों और बयान के आधार पर सुभाष को उम्रकैद की सजा सुनाई।

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