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सहकारिता के जरिए होता है गांव का विकास… ‘सहकार से समृद्धि’ कार्यक्रम में बोले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

उमाकांत त्रिपाठी। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शनिवार को गुजरात दौरे पर रहे। उन्होंने गांधीनगर में 102वें अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर आयोजित ‘सहकार से समृद्धि’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस मौके पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और सचिव, सहकारिता मंत्रालय कई लोग मौजूद रहे।

अब कश्मीर में लहरा रहा तिरंगा
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा किआज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्मदिन है और आज अगर बंगाल औऱ कश्मीर भारत का हिस्सा हैं, तो इसका एकमात्र कारण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने ही एक देश में दो विधान, दो प्रधान औऱ दो निशान नहीं चलेगें के आंदोलन का नेतृत्व किया और इसके लिए लड़ते-लड़ते अपना बलिदान दिया। अमित शाह ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में कश्मीर से दो विधान, दो प्रधान और दो निशान समाप्त हो गए हैं और वहां तिरंगा बड़ी शान से लहरा रहा है। उन्होंने कहा कि आज बाबू जगजीवन राम जी की पुण्यतिथि है, जिन्होंने देश के दलितों के लिए कई विकास कार्यक्रम चलाए और सामाजिक समरसता और धर्म परिवर्तन के विरोध की नींव रखी।

नैनो यूरिया पर मिलेगी सब्सिडी
अमित शाह ने कहा कि आज गुजरात सरकार ने एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए नैनो-यूरिया और नैनो-डीएपी पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी देने की की घोषणा की है। उन्होंने इस निर्णय के लिए गुजरात सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि किसान जब एक बार नैनो-यूरिया का छिड़काव करते हैं तो फिर बाद में उन्हें थैली से यूरिया डालने की ज़रूरत नहीं है। अमित शाह ने कहा कि खेत में नैनो-यूरिया और नैनो-डीएपी का छिड़काव ज़्यादा उत्पादन के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन्हें सस्ता किया है और किसानों को इनका उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने और जैविक खेती करने वाले किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने नेश्नल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड की स्थापना की है। अमित शाह ने कहा कि आज NCOL द्वारा भारत ऑर्गेनिक आटा का भी लोकार्पण हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत ऑर्गेनिक और अमूल दोनों ही विश्वसनीय और शत-प्रतिशत ऑर्गेनिक ब्रांड हैं। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे आधुनिक तकनीक से जांच करके ही ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स पर भारत ब्रांड की मोहर लगती है।

हर गांव तक पहुंचे सहकारिता
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत में सहकारिता कोई नया विचार नहीं है और लगभग सवा सौ साल पुराने विचार को हमारे पुरखों ने अपनाया था। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल, महात्मा गांधी, गाडगिल जी, बैकुंठ भाई मेहता और त्रिभुवनदास पटेल जैसे कई मनीषियों ने इसकी शुरूआत की। उन्होंने कहा कि फिर एक समय आया जब ये विचार धीरे-धीरे कमज़ोर होता चला गया। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सहकारिता की प्रासंगिकता को पहचानते हुए नए सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की। उन्होंने कहा कि आज हम एकमहत्वपूर्ण मुकाम पर खड़े हैं और सवा सौ साल पुराना सहकारिता आंदोलन आज देश के कई क्षेत्रों में अपना बड़ा योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि ऋण के वितरण में 20 प्रतिशत, फर्टिलाइज़र्स के वितरण में 35 औरउत्पादन में 21 प्रतिशत, चीनी उत्पादन में 31 प्रतिशत, गेहूं की खरीदी में 13 प्रतिशत और धान की खरीदी में 20 प्रतिशत का योगदान सहकारिता क्षेत्र दे रहा है। उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र ग्रामीण और कृषि अर्थव्यस्था में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि हमें अगले 5 साल में सहकारिता की एक ऐसी मज़बूत नींव डालनी है जिससे अगले 125 साल तक सहकारिता हर गांव और घर तक पहुंचे।

मोदी सरकार लाई है दो नई योजनाएं
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार सहकारिता के माध्यम से दो नई योजनाएं लेकर आई है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल को प्रोत्साहन देने और मक्के का उत्पादन करने वाले किसानों की समृद्धि के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने व्यवस्था की है कि सरकार की दो बड़ी कोऑपरेटिव संस्थाएं किसानों द्वारा उत्पादित मक्का की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य़ पर ऑनलाइन करेंगी और इससे एथेनॉल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ किसान समृद्ध होंगे बल्कि पेट्रोल का आयात कम होने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी बढ़ाने में मदद मिलेगी। अमित शाह ने कहा कि इसी प्रकार 4 प्रकार के दलहन को भी अब NAFED और कंज्यूमर कोऑपरेटिव संस्थाएं शत-प्रतिशत एमएसपी पर खरीदेंगी। उन्होंने कहा कि हमें Cooperation Amongst Cooperatives यानी सहकारी संस्थाओं के बीचसहकारिता को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हम सहकारिता क्षेत्र का पूरा आर्थिक व्यवहार सहकारिता क्षेत्र में ही कर लेते हैं तो हमें सहकारिता क्षेत्र के बाहर से एक भी पैसा लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।सहकारिता मंत्री ने नाबार्ड और देशभर के सभी राज्य सहकारी बैंकों से आग्रह किया कि हर Primary Agriculture Credit Society (PACS) और अन्य सहकारी संस्थाओं को अपना खाता ज़िला सहकारी बैंक या राज्य सहकारी बैंक में खुलवाना चाहिए जिससे सहकारिता क्षेत्र तो मजबूत होगा ही, साथ ही पूंजी और आत्मविश्वास भी बढ़ेंगे।

 

 

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