मध्य प्रदेश

सीएम मोहन-प्रदेशाध्यक्ष ने ऐसे किया पूर्व सीएम बाबूलाल गौर को याद, इस तरह मजदूर से प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे गौर!

उमाकांत त्रिपाठी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को भोपाल में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर की पुण्यतिथि पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। एक्स पर पोस्ट कर उन्होंने लिखा- “आज, मैंने भोपाल में भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर जी की पुण्यतिथि पर उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।”

उन्होंने आगे लिखा कि पूर्व सीएम का जनसेवा और राज्य की प्रगति के प्रति समर्पण हमेशा उन्हें प्रेरित करता रहेगा। जनसेवा और राज्य की प्रगति के लिए समर्पित आपका जीवन हमें हमेशा प्रेरित करता रहेगा।” इस दौरान बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी पार्टी कार्यालय में पूर्व सीएम गौर को पुष्पांजलि अर्पित की।

वीडी शर्मा ने भी पुष्पांजलि
वीडी शर्मा ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता बाबूलाल गौर जी की पुण्यतिथि पर प्रदेश कार्यालय में उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।”

एमपी के 16वें मुख्यमंत्री थे गौर
गौरतलब है कि बाबूलाल गौर अगस्त 2004 से नवंबर 2005 तक मध्य प्रदेश के 16वें मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने अपने जीवन में ‘मजदूर’ से लेकर सीएम तक का लंबा सफर तय किया। वे एक ऐसे नेता थे जो पद के अनुसार आगे बढ़े। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में 1930 में जन्मे बाबूराम यादव ने भोपाल टेक्सटाइल मिल में काम किया और कई आंदोलनों का नेतृत्व करने के बाद ‘मजदूर’ नेता के रूप में उभरे और बाद में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

10 बार जीते विधानसभा चुनाव
21 अगस्त, 2019 को हार्ट अटैक के चलते भोपाल के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में उनका निधन हो गया। गौर मध्य प्रदेश विधानसभा के रिकॉर्ड 10 बार सदस्य रहे। गौर शुरुआत में वामपंथी संघर्ष आंदोलन से जुड़े थे और उन्होंने कुछ समय के लिए भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के साथ भी काम किया, लेकिन अंततः 1946 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गए और राष्ट्रीय मजदूर संघ के संस्थापक सदस्य बन गए।

इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे
इमरजेंसी के दौरान 19 महीने तक हिरासत में रहे गौर ने गोवा की स्वतंत्रता सहित कई राष्ट्रीय स्तर के आंदोलनों में भाग लिया। उन्होंने 1971 में भोपाल दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से अपनी पहली राजनीतिक लड़ाई लड़ी, लेकिन असफल रहे, लेकिन 1974 में उपचुनाव में सीट जीतने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। गौर ने 1977 में गोविंदपुरा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और 2018 तक सीट बरकरार रखी।

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